YOUTH SANSAD: संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में आयोजित ‘विकसित भारत युवा संसद-2026’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि वे आज उस पवित्र और ऐतिहासिक कक्ष में बैठे हैं, जो भारत की महान लोकतांत्रिक परंपराओं और गौरवशाली इतिहास का साक्षी रहा है. उन्होंने रेखांकित किया कि भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है. यह हर नागरिक को समान अधिकार देते हुये उनका मार्गदर्शन करता है. उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इस ऐतिहासिक स्थल की ऊर्जा से प्रेरणा लें और वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा करने में अपनी पूरी ताकत झोंक दें. यह ऐतिहासिक स्थल भारत की लोकतांत्रिक विरासत और संवैधानिक परंपराओं का प्रतीक है.
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा है कि देश के युवा वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में निर्णायक भूमिका निभायेंगे. उन्होंने युवाओं से लोकतांत्रिक मूल्यों को आत्मसात करते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया. लोकसभा अध्यक्ष ने युवाओं से इस ऐतिहासिक वातावरण से प्रेरणा लेकर विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए पूरी ऊर्जा और क्षमता के साथ कार्य करने का आग्रह करते हुए कहा कि देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और वर्तमान में 50 लाख से अधिक युवा, युवा संसद कार्यक्रम से जुड़े हुए हैं.
उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों, भाषाओं और संस्कृतियों का प्रतिनिधित्व देखने को मिल रहा है, जो ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करता है. विविधताओं के बावजूद सभी युवा एक विकसित और आत्मनिर्भर भारत के साझा लक्ष्य से जुड़े हैं. बिरला ने कहा कि लोकतंत्र भारत की सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा है और इसकी जड़ें प्राचीन भारतीय सभाओं एवं समितियों तक जाती हैं. भारतीय लोकतंत्र समय के साथ और अधिक सशक्त हुआ है तथा आज विश्व के लिए एक उदाहरण बना हुआ है. उन्होंने युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय तथा लोकसभा सचिवालय के संसदीय लोकतंत्र शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान (प्राईड) की सराहना करते हुए कहा कि युवा संसद जैसे मंच भावी नेतृत्व तैयार करने और लोकतांत्रिक चेतना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
विकसित भारत की परिकल्पना का उल्लेख करते हुए केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 तक एक विकसित भारत की कल्पना की है, जब देश स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ मनायेगा. उन्होंने युवाओं से इस राष्ट्रीय लक्ष्य को साकार करने में सक्रिय योगदान देने का आग्रह किया. भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह जनसांख्यिकीय लाभांश हमारी शक्ति और हमारा सामर्थ्य है. युवा न केवल हमारा भविष्य हैं, बल्कि वे समाधान भी हैं. भारत की लगभग 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है. उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यदि युवा सामूहिक संकल्प लें तो वे देश के सामने आने वाली हर चुनौती का समाधान ढूंढ सकते हैं. प्रधानमंत्री ने भारत के युवाओं की क्षमताओं पर निरंतर विश्वास जताया है और जनजातीय समुदायों, तटीय क्षेत्रों और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों सहित विभिन्न पृष्ठभूमियों से एक लाख युवा नेताओं को तैयार करने का आह्वान किया है. प्रधानमंत्री ने कहा है कि राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए ऐसे एक लाख युवा नेताओं को तैयार किया जाना चाहिए. युवा कार्यक्रम मंत्रालय ने यह जिम्मेदारी ली है.
डॉ. मंडाविया ने एमवाई भारत के अंतर्गत युवा नेतृत्व वाली पहलों के बढ़ते प्रभाव पर भी प्रकाश डाला, जिनमें विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग, वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम, विकसित भारत बजट क्विज, युवा कनेक्ट और अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं, जो युवाओं को शासन, सामुदायिक सेवा और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय रूप से शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करते हैं. युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय द्वारा नयी दिल्ली में 15-17 जून 2026 तक विकसित भारत युवा संसद 2026 का आयोजन किया जा रहा है. इसका उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में युवाओं की भागीदारी को परिपुष्ट करना और शासन, नीतिगत विचार-विमर्श और संसदीय कामकाज का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है. राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित इस सम्मेलन में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शीर्ष प्रदर्शन करने वाले युवा प्रतिनिधियों को राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर विचार-विमर्श करने और विकसित भारत@2047 की परिकल्पना में योगदान देने के लिए एक साथ जोड़ा गया है.
