पीएम मोदी की अपील: एक साल सोना न खरीदें, क्या है वजह?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Photo: PTI)

भारत अपनी जरूरत का करीब 85-90% कच्चा तेल बाहर के देशों से मंगाता है. इसलिए अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच बढ़ती ग्लोबल ऑयल प्राइस का सीधा असर उस पर पड़ा है. इससे देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है. जानें सोना कब ज्यादा खरीदते हैं लोग.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (10 मई) को लोगों से खर्च कम करने की अपील की. उन्होंने कहा कि हालात को देखते हुए सोना खरीदने से बचें, विदेश यात्रा टालें. साथ हीं जहां संभव हो वर्क फ्रॉम होम अपनाएं, ताकि बढ़ती तेल कीमतों के असर को कम किया जा सके. पीएम मोदी ने हैदराबाद में बीजेपी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में जारी लंबे संघर्ष के कारण सप्लाई चेन पर दबाव है. ऐसे में भारत को विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) बचाने और फ्यूल का खर्च कम करने पर ध्यान देना चाहिए.

सोने की कीमत में काफी उतार-चढ़ाव

अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से ग्लोबल मार्केट में सोने के दाम काफी उतार-चढ़ाव में हैं. वेस्ट एशिया में जैसे ही तनाव बढ़ता है या सीजफायर में रुकावट आती है, बुलियन मार्केट तुरंत रिएक्ट करता है. इससे कीमतों में तेज बदलाव देखने को मिलता है. आमतौर पर युद्ध या अनिश्चितता के समय सोना “सेफ हेवन” माना जाता है, यानी लोग तेजी से इसमें निवेश करते हैं.

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पीएम मोदी ने लोगों से कम से कम एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की. उन्होंने कहा कि सोने के आयात में काफी विदेशी मुद्रा खर्च होती है, जो संकट के समय देश पर अतिरिक्त दबाव डालती है. मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय हित में हमें एक साल तक सोना खरीदने से बचना चाहिए.

हॉर्मुज स्ट्रेट का रूट है प्रभावित

ईरान और अमेरिका के बीच चल रही जंग का असर हॉर्मुज स्ट्रेट पर साफ दिख रहा है, जो दुनिया का बड़ा तेल सप्लाई रूट है. 28 फरवरी से शुरू हुआ यह टकराव अभी तक खत्म नहीं हुआ है. इसी वजह से लंबे समय तक तेल की कमी और सप्लाई में दिक्कत बढ़ने का खतरा बना हुआ है, जिसका असर कई देशों पर पड़ सकता है. प्रधानमंत्री मोदी की यह अपील उस वक्त आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया. इसके बाद कच्चे तेल की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई. इस वजह से महंगाई और एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है.

88% से ज्यादा कच्चा तेल बाहर से आता है भारत में

भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा कच्चा तेल बाहर से मंगाता है, इसलिए तेल की कीमतें बढ़ते ही उस पर सीधा असर पड़ा है. हाल के हफ्तों में रुपये की कीमत भी डॉलर के मुकाबले काफी कमजोर हुई है, जिससे हालात और मुश्किल हो गए हैं.

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By Amitabh Kumar

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