Karnataka Election 2023: टीपू सुल्तान को किसने मारा? चुनाव से पहले कर्नाटक में ताजा विवाद

भाजपा के कुछ नेता समेत एक वर्ग का दावा है कि इन दोनों वोक्कालिगा सरदारों ने पूर्ववर्ती मैसुरू के शासक टीपू सुल्तान की हत्या की थी. प्रतिष्ठित इतिहासकारों ने इस दावे का विरोध किया है. जबकि कांग्रेस और जनता दल (सेक्यूलर) नेताओं का कहना है कि उरी गौड़ा और नांजे गौड़ा अस्तित्व में ही नहीं थे.

कर्नाटक में विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है. तारीखों की घोषणा से पहले ही बीजेपी, कांग्रेस सहित तमाम राजनीतिक पार्टियों ने जोर आजमाइश शुरू कर दी है. पीएम मोदी समेत बीजेपी के दिग्गज नेता लगातार रैली कर रहे हैं. इस कर्नाटक में टीपू सुल्तान को लेकर ताजा विवाद शुरू हो गया है. विवाद मैसूर शासक की हत्या से जुड़ा है. अब इस मामले में यह भी कहा जा रहा है कि इस ताजा विवाद से कहीं बीजेपी को राज्य में नुकसान न हो जाए. हालांकि कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने इसे खारिज कर दिया है.

क्या है विवाद

दरअसल भाजपा के कुछ नेता समेत एक वर्ग का दावा है कि इन दोनों वोक्कालिगा सरदारों ने पूर्ववर्ती मैसुरू के शासक टीपू सुल्तान की हत्या की थी. प्रतिष्ठित इतिहासकारों ने इस दावे का विरोध किया है. जबकि वोक्कालिगा समुदाय के सरदारों उरी गौड़ा और नांजे गौड़ा को लेकर उठे विवाद के बीच समुदाय के एक प्रमुख संत ने इस संबंध में ऐतिहासिक साक्ष्यों की कमी का हवाला देते हुए इस मुद्दे को समाप्त करने की अपील की थी.

कांग्रेस और जनता दल (सेक्यूलर) ने उरी गौड़ा और नांजे गौड़ा को बताया काल्पनिक किरदार

कांग्रेस और जनता दल (सेक्यूलर) नेताओं का कहना है कि उरी गौड़ा और नांजे गौड़ा अस्तित्व में ही नहीं थे और यह काल्पनिक किरदार हो सकते हैं, जिसके सहारे भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर वोक्कालिगा बहुल ‘ओल्ड मैसूरु’ क्षेत्र में पैर जमाने की कोशिश कर रही है.

क्या टीपू सुल्तान की हत्या वाले बयान से हो सकता है बीजेपी को नुकसान

टीपू सुल्तान की हत्या के इतिहास पर उठे विवाद को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को झटका लगने की बात खारिज करते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि जीत उस दि होगी जिस दिन उचित शोध के बाद सच्चाई सामने आएगी. यह पूछने पर कि क्या इस विवाद का पार्टी पर प्रतिकूल असर पड़ेगा, इस पर बोम्मई ने कहा, कोई झटका लगने का सवाल ही नहीं है. जब शोध होगा और जिस दिन सच्चाई सामने आएगी, हमें जीत मिलेगी. कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए बोम्मई ने एक सवाल के जवाब में कहा, मैं केवल उरी गौड़ा और नांजे गौड़ा के बारे में बात नहीं कर रहा हूं. आजादी के बाद कर्नाटक समेत देशभर में कई ऐतिहासिक सच दबा दिए गए और इतिहास को तोड़-मरोड़ दिया. सभी को मालूम है कि तब किसने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी. अगर अब सच्चाई बतायी जाती है तो ये उसे हजम नहीं कर पाएंगे.

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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