NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद और इसे लेकर देशभर में छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उनके इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार करते हुए प्रह्लाद जोशी को उनके मौजूदा मंत्रालयों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी सौंपने की मंजूरी दी है.
कौन हैं प्रह्लाद जोशी?
प्रह्लाद जोशी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता हैं और कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं. केंद्र सरकार में वह पहले से ही उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (Minister of Consumer Affairs, Food and Public Distribution of India) का कार्यभार संभाल रहे हैं. इसके अलावा वह इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) के अध्यक्ष भी हैं.
शिक्षा और राजनीतिक सफर
27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुरा जिले में जन्मे प्रह्लाद जोशी ने कला (Arts) विषय से शिक्षा प्राप्त की. कम उम्र में ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े और बाद में भारतीय जनता पार्टी के जरिए सक्रिय राजनीति में आए. तीन दशक से अधिक लंबे सार्वजनिक जीवन और संसदीय अनुभव के कारण उन्हें भाजपा के अनुभवी नेताओं में गिना जाता है.
चुनौतीपूर्ण समय में मिली नई जिम्मेदारी
प्रह्लाद जोशी को ऐसे समय शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जब NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए कई सुधारों पर काम कर रही है. ऐसे में शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभालना उनके लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है.
धर्मेंद्र प्रधान ने क्यों दिया इस्तीफा?
धर्मेंद्र प्रधान ने NEET-UG 2026 पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है. प्रधान के मुताबिक, उन्होंने यह फैसला इसलिए लिया ताकि "राष्ट्रविरोधी ताकतें" इस मुद्दे का फायदा उठाकर भ्रम न फैला सकें.
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