कौन हैं Bittu Tabahi? जिन्होंने अकेले ही साफ कर डाली नदी, पद्मश्री देने की उठ रही मांग

Who Is Bittu Tabahi: अगर आप भी सोशल मीडिया चलाते हैं, तो आपने मोबाइल की स्क्रीन पर अंगूठे को फेरते समय बिट्टू तबाही (Bittu Tabahi) को जरूर देखा होगा. केवल 21 साल के बिट्टू ने वो काम कर दिखाया, जिसे करने के लिए हिम्मत और जज्बे की दरकार होती है. बिट्टू ने अकेले नदी को साफ करके दिखा दिया है. बिट्टू अपनी कड़ी मेहनत से रातों-रात स्टार बन गया है. कोई उसे 'दशरथ मांझी' कह रहा है, तो कोई उसे 'पद्मश्री' से सम्मानित करने की मांग कर रहा है. तो आइए आपको मिलाते हैं बिट्टू तबाही से.

Who Is Bittu Tabahi: बिट्टू तबाही, जिसका असली नाम सुरेंद्र सिंह चौधरी है, मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा का रहने वाला है. बिट्टू बीएससी (B.Sc) का छात्र है और सोशल मीडिया क्रिएटर भी है. उसने अपने इंस्टाग्राम के बायो में खुद को Environmental Activist (पर्यावरण कार्यकर्ता) भी बताया है.

क्यों हो रही बिट्टू तबाही की इतनी चर्चा?

बिट्टू तबाही की सोशल मीडिया पर इस समय सबसे अधिक चर्चा हो रही है. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वायरल होने से पहले इंस्टाग्राम पर उसके केवल 2.8 से 3 लाख फॉलोअर्स थे, लेकिन दो से तीन दिनों में ही उसके फॉलोअर्स की संख्या बढ़कर 1.87 मिलियन (Million) से अधिक हो गई. अब आपको बताते हैं कि आखिर बिट्टू इतना फेमस क्यों हो गया. दरअसल, बिट्टू ने अजनार नदी को अकेले ही साफ कर डाला. उसने 26 जनवरी 2026 को नदी की सफाई का अभियान शुरू किया. गणतंत्र दिवस के दिन उसने संकल्प लिया कि कुछ ऐसा करना चाहिए, जिससे समाज को फायदा हो. शुरुआत में उसका साथ उसके दोस्तों ने दिया, लेकिन दिन बीतने के साथ उनका साथ छूटता चला गया. इसके बावजूद बिट्टू का हौसला नहीं टूटा. उसने सफाई अभियान जारी रखा—वह खुद नदी में उतरता और घंटों सफाई करता.


सफाई में बिट्टू के खर्च हुए 30 हजार से अधिक रुपये

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नदी की सफाई के दौरान बिट्टू तबाही को अपनी जेब से भी पैसे खर्च करने पड़े. रिपोर्ट्स की मानें तो बिट्टू के 30 हजार रुपये से अधिक नदी को साफ करने में लग गए.

बिट्टू को ताने भी सहने पड़े

नदी की सफाई के दौरान बिट्टू को लोगों की तारीफ तो मिली ही, साथ में तानों और आरोपों का भी सामना करना पड़ा. बिट्टू ने नदी को साफ करते हुए अपनी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर डाले, लेकिन कुछ लोगों ने उस पर महज व्यूज और लाइक्स पाने के लिए सफाई करने का आरोप लगा दिया. हालांकि, लोगों की नकारात्मक टिप्पणियों (Negative comments) के बावजूद बिट्टू ने अपना इरादा नहीं बदला और अंततः नदी को पूरी तरह साफ कर दिया.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी हुए मुरीद, सीएम आवास बुलाकर किया सम्मानित

अकेले दम पर नदी की सफाई करके बिट्टू ने न केवल अपने राज्य में, बल्कि दुनिया भर में अपनी पहचान बनाई. मध्य प्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव भी उसके मुरीद हो गए और उसे सीएम आवास बुलाकर सम्मानित किया. सीएम ने बिट्टू से मुलाकात का वीडियो भी शेयर किया और अपनी पोस्ट में लिखा:

"भोपाल में मुख्यमंत्री आवास पर 'ब्यावरा' के बेटे सुरेंद्र सिंह चौधरी 'बिट्टू तबाही' के साथ एक आत्मीय मुलाकात हुई. अपने अटूट संकल्प और दृढ़ निश्चय से बिट्टू ने न केवल अजनार नदी की सफाई की, बल्कि अपनी कोशिशों से समाज को यह संदेश भी दिया कि बदलाव के लिए किसी बड़ी भीड़ की जरूरत नहीं होती—बस एक सच्ची पहल ही काफी है.
आपकी यह पहल 'जल गंगा संवर्धन अभियान' की भावना को भी मजबूत करती है, जिसका मुख्य उद्देश्य जन-भागीदारी से जल स्रोतों का संरक्षण और पुनरुद्धार करना है. मुझे पूरा भरोसा है कि अजनार नदी से शुरू हुआ आपका यह संकल्प राज्य के युवाओं को अपने आस-पास के जल स्रोतों की सुरक्षा के लिए प्रेरित करेगा. पूरे राज्य को आप पर गर्व है."


नीदरलैंड्स से मिला ऑफर

बिट्टू अपने काम से इतना फेमस हो गया कि उसे नीदरलैंड्स से नौकरी का ऑफर मिल गया. नीदरलैंड्स की मशहूर पर्यावरण संस्था 'द ओशियन क्लीनअप' (The Ocean Cleanup) के सीईओ बॉयन स्लैट (Boyan Slat) ने सोशल मीडिया पर उसकी तस्वीर देखकर सीधे लिखा— "Come work for us" (आओ हमारे साथ काम करो).

बिट्टू तबाही को पद्मश्री देने की मांग उठी

बिट्टू तबाही के काम की तारीफ सोशल मीडिया पर जमकर हो रही है. कोई उसकी तुलना 'दशरथ मांझी' से कर रहा है, तो कोई उसे पद्मश्री देने की मांग कर रहा है. Being Political नाम के इंस्टा यूजर ने बिट्टू के पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, "आप पद्मश्री के हकदार हैं." वहीं Jay Bhosale 🇮🇳 ने लिखा, "महाराष्ट्र से ढेर सारा प्यार छोटे, तुम पर गर्व है."

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लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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