क्या है 'जिहादी ड्रग'? भारत में पहली बार पकड़ा गया, NCB ने 182 करोड़ की कैप्टागॉन जब्त की

Jihadi Drug NCB Seize Captagon: भारतीय नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने अंतर्राष्ट्रीय ड्रग्स के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कैप्टागॉन की बड़ी खेप पकड़ी है. इसकी कुल अनुमानित कीमत 182 करोड़ बताई जा रही है, जिसे मिडिल ईस्ट के देशों में सप्लाई किया जाना था. इसे जिहादी ड्रग भी कहा जाता है.

Jihadi Drug NCB Seize Captagon: नशे के खिलाफ भारत सरकार ने अपना अभियान तेज कर दिया है. केवल 16 मई को ही 200 करोड़ से ज्यादा की ड्रग्स पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है. इसमें सबसे बड़ी खेप कैप्टागोन की पकड़ी गई है. इसे आम तौर पर जिहादी ड्रग भी कहा जाता है. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने ‘ऑपरेशन RAGEPILL’ के तहत एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है. इसके जरिए कुख्यात सिंथेटिक स्टिमुलेंट कैप्टागॉन को  पकड़ा है, जिसकी कुल कीमत 182 करोड़ रुपये आंकी गई है. भारत में कैप्टागोन की यह पहली बड़ी बरामदगी मानी जा रही है.

खतरनाक मादक पदार्थ कैप्टागोन एक अत्यधिक नशे की लत पैदा करने वाला साइकोट्रॉपिक पदार्थ है. कैप्टागोन में मुख्य रूप से फेनेटाइलीन और एम्फेटामाइन पाए जाते हैं, जिन्हें एनडीपीएस एक्ट के तहत साइकोट्रॉपिक पदार्थ माना जाता है. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि इसका इस्तेमाल पश्चिम एशिया में इस्लामिक स्टेट के आतंकियों द्वारा किया जाता है. इसी वजह से इसे ‘जिहादी ड्रग’ भी कहा जाता है. बरामद गोलियों पर दो आपस में जुड़े अर्धचंद्र (क्रेसेंट मून) का लोगो बना हुआ है. सूत्रों के मुताबिक इसी वजह से अरबी बोलचाल में इस ड्रग को ‘अबू हिलालैन’ यानी ‘दो चांदों का पिता’ कहा जाता है. 

इस ड्रग को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेज एक्ट के तहत कड़े नियंत्रण में रखा गया है. ‘ऑपरेशन रेजपिल’ में एक सीरियाई नागरिक अल्ब्रास अहमद को गिरफ्तार किया गया है. उसके पास से 227.7 किलोग्राम कैप्टागोन टैबलेट और पाउडर बरामद हुआ, जिसकी कीमत करीब 182 करोड़ रुपये आंकी गई है. माना जा रहा है इस ड्रग्स को मिडिल ईस्ट के देशों में भेजा जा रहा था और भारत को ट्रांजिट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था. 

क्या है गरीबों का कोकीन/जिहादी ड्रग/कैप्टागॉन?

कैप्टागॉन (वैज्ञानिक नाम फेनेथिलीन) एक कृत्रिम रूप से तैयार किया गया नशीला उत्तेजक पदार्थ (सिंथेटिक स्टिमुलेंट) है. इसे सबसे पहले 1960 के दशक में कुछ बीमारियों (अटेंशन डिस्ऑर्डर या नार्कोलेप्सी) के इलाज के लिए दवा के रूप में विकसित किया गया था. कैप्टागॉन शरीर की थकान कम करने के साथ व्यक्ति को ज्यादा आक्रामक, निडर और जोखिम उठाने वाला बना देता है. लेकिन बाद में इसके गंभीर दुष्प्रभाव सामने आने लगे, जिसके चलते दुनिया के अधिकांश देशों ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया. 

1980 के दशक तक इसका आधिकारिक उत्पादन बंद कर दिया गया था. हालांकि कानूनी तौर पर इसका निर्माण रुक गया, लेकिन अवैध नेटवर्क के जरिए इसका उत्पादन लगातार जारी रहा. प्रतिबंध ही अक्सर चीजों की तस्करी को पैदा करते हैं. माना जाता है कि पिछले कुछ वर्षों में यूरोप और खासकर मिडिल ईस्ट के देशों में इसकी तस्करी और खपत तेजी से बढ़ी है. कम लागत में तैयार होने और अवैध बाजार में इसकी भारी मांग के कारण कुछ क्षेत्रों में इसे ‘गरीबों का कोकीन’ भी कहा जाता है.

गृह मंत्री अमित शाह ने एनसीबी को दी बधाई

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘ऑपरेशन रेजपिल’ को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए एनसीबी के बहादुर और सतर्क अधिकारियों को बधाई दी. अमित शाह ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, ‘मोदी सरकार ‘ड्रग-फ्री इंडिया’ के संकल्प के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. हमारी एजेंसियों ने 182 करोड़ रुपये मूल्य की तथाकथित ‘जिहादी ड्रग’ कैप्टागोन की पहली बड़ी खेप जब्त की है. मिडिल ईस्ट भेजी जा रही इस ड्रग खेप को पकड़ना और एक विदेशी नागरिक की गिरफ्तारी हमारी ड्रग्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का मजबूत उदाहरण है. भारत में आने वाले या भारत की जमीन का ट्रांजिट रूट के तौर पर इस्तेमाल कर बाहर भेजे जाने वाले हर ग्राम ड्रग्स पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी. एनसीबी के बहादुर और सतर्क अधिकारियों को बधाई.’

कैसे पकड़ में आया ड्रग्स?

इस कार्रवाई की शुरुआत 11 मई को दिल्ली में हुई, जब एक विदेशी ड्रग कानून प्रवर्तन एजेंसी से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर एनसीबी को पता चला कि भारत का इस्तेमाल इस ड्रग की ट्रांजिट लोकेशन के रूप में किया जा रहा है. इसके बाद नई दिल्ली के नेब सराय इलाके में एक मकान की पहचान की गई. 11 मई को वहां छापेमारी के दौरान करीब 31.5 किलोग्राम कैप्टागोन टैबलेट बरामद की गईं. ये ड्रग्स बेहद सावधानी से एक कमर्शियल चपाती काटने वाली मशीन में छिपाई गई थीं. शुरुआती जांच में पता चला कि इस मशीन को सऊदी अरब के जेद्दा भेजा जाना था.

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि गिरफ्तार सीरियाई नागरिक 15 नवंबर 2024 को टूरिस्ट वीजा पर भारत आया था. उसका वीजा 12 जनवरी 2025 को समाप्त हो गया था, लेकिन वह अवैध रूप से भारत में रह रहा था. उसने नेब सराय में किराए पर मकान लिया हुआ था.

आरोपी से पूछताछ के बाद 14 मई को गुजरात के मुंद्रा स्थित कंटेनर फैसिलिटेशन स्टेशन (CFS) में एक कंटेनर से करीब 196.2 किलोग्राम कैप्टागोन पाउडर भी बरामद किया गया. यह कंटेनर सीरिया से आयात किया गया था और दस्तावेजों में इसमें भेड़ की ऊन होने की जानकारी दी गई थी. लेकिन जब कंटेनर की गहन तलाशी ली गई तो उसमें छिपाए गए तीन बैग मिले, जिनमें 196.2 किलोग्राम कैप्टागोन पाउडर बरामद हुआ.

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कुछ दिन पहले 349 किग्रा कोकीन पकड़ी गई थी

प्रारंभिक जांच से पता चला है कि यह खेप खाड़ी देशों, खासकर सऊदी अरब और आसपास के मिडिल ईस्ट के देशों में भेजी जानी थी, जहां कैप्टागोन का दुरुपयोग कानून व्यवस्था और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्या बन चुका है. साथ ही यह भी सामने आया कि ड्रग सिंडिकेट समुद्री कार्गो और कंटेनर रूट का तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं. हाल ही में मुंबई में भी इक्वाडोर से आए एक शिपिंग कंटेनर में 349 किलोग्राम कोकीन बरामद की गई थी. एनसीबी अब इस गिरोह के सप्लाई नेटवर्क, हवाला लेनदेन, वित्तीय स्रोतों और अंतरराष्ट्रीय संचालकों की गहराई से जांच कर रही है.

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Published by: Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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