मैंने किया क्या है? 1984 सिख दंगा मामले में CBI के समन पर जगदीश टाइटलर ने कहा

सीबीआई की ओर से समन भेजे जाने के बाद जगदीश टाइटलर ने कहा कि आखिर मैंने किया क्या है? उन्होंने कहा कि यदि उनके पास मेरे खिलाफ कोई सबूत है, तो मैं फांसी पर लटकने के लिए तैयार हूं. उन्होंने यह भी कहा कि यह 1984 के दंगे से संबंधित मामला नहीं है.

नई दिल्ली : 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत पूरे भारत में हुए सिख विरोधी दंगा मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से आवाज का नामूना लेने के लिए कांग्रेस के नेता जगदीश टाइटलर को समन भेजा गया है. सीबीआई की ओर से समन भेजे जाने के बाद जगदीश टाइटलर ने कहा कि आखिर मैंने किया क्या है? उन्होंने कहा कि यदि उनके पास मेरे खिलाफ कोई सबूत है, तो मैं फांसी पर लटकने के लिए तैयार हूं. उन्होंने यह भी कहा कि यह 1984 के दंगे से संबंधित मामला नहीं है, जिसमें वे मेरे आवाज का नमूना लेना चाहते हैं, बल्कि यह कुछ और ही मामला है.

सीबीआई ने टाइटलर को भेजा समन

समाचार एजेंसी भाषा की एक रिपोर्ट के अनुसार, केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने दिल्ली के पुल बंगश इलाके में 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों के मामले में आवाज का नमूना लेने के लिए मंगलवार को कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर को तलब किया गया. सीबीआई के अधिकारियों ने बताया कि जगदीश टाइटलर केंद्रीय फॉरेन्सिक विज्ञान प्रयोगशाला पहुंचे, जहां आगे की कार्रवाई जारी है.

सीबीआई को मिले नए सबूत

रिपोर्ट में बताया गया है कि केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई को 39 साल पुराने सिख विरोधी दंगों के मामले में नए सबूत मिले हैं, जिसके बाद टाइटलर की आवाज का नमूना लेने की जरूरत पड़ी. दंगों के दौरान पुल बंगश इलाके में कथित तौर पर तीन लोग मारे गए थे. वर्ष 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या किए जाने के बाद देश में सिख समुदाय पर कथित तौर पर हिंसक हमले किए गए थे.

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मेरे खिलाफ कोई सबूत नहीं : टाइटलर

समाचार एजेंसी एएनआई के एक ट्वीट के अनुसार, सीबीआई की ओर से समन भेजे जाने के बाद जगदीश टाइटलर ने कहा कि आखिर मैंने किया क्या है? उन्होंने कहा कि यदि उनके पास मेरे खिलाफ कोई सबूत है, तो मैं फांसी पर लटकने के लिए तैयार हूं. उन्होंने यह भी कहा कि यह 1984 के दंगे से संबंधित मामला नहीं है, जिसमें वे मेरे आवाज का नमूना लेना चाहते हैं, बल्कि यह कुछ और ही मामला है.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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