80s सिर्फ एक दशक नहीं था...
वह दौर था जब भारत धीरे-धीरे पुराने भारत से निकलकर उस भारत की तरफ बढ़ रहा था, जिसे हम आज जानते हैं.
एक तरफ इंदिरा गांधी की वापसी, पंजाब संकट, Bhopal और राजनीतिक उथल-पुथल थी. दूसरी तरफ रंगीन टीवी, क्रिकेट, Maruti 800, Ramayan, कंप्यूटर और नई युवा राजनीति भारत की रोजमर्रा की जिंदगी बदल रहे थे.
1980 से 1989 के बीच हर साल ने भारत की कहानी में कुछ ऐसा जोड़ा, जिसकी गूंज आज भी सुनाई देती है.
1980: इंदिरा गांधी की वापसी
'जनता प्रयोग' खत्म, इंदिरा फिर सत्ता में
1980 की शुरुआत भारतीय राजनीति में बड़े बदलाव के साथ हुई.
1977 में Emergency के बाद सत्ता से बाहर हुईं इंदिरा गांधी जनवरी 1980 के लोकसभा चुनाव के बाद फिर प्रधानमंत्री बनीं.
इसके पीछे की कहानी
Emergency के बाद बनी Janata Party सरकार में कुछ ही वर्षों में अंदरूनी संघर्ष शुरू हो गया. मोरारजी देसाई सरकार गिर गई और राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती गई.
ऐसे माहौल में जनता ने फिर इंदिरा गांधी को मौका दिया.
भारत के लिए इसका मतलब
1980 ने यह साफ कर दिया कि भारतीय राजनीति में Congress और इंदिरा गांधी की पकड़ अभी खत्म नहीं हुई थी.
लेकिन यह उनकी सत्ता वापसी भर नहीं थी.
आने वाले वर्षों में भारत को पंजाब संकट, असम आंदोलन, आर्थिक दबाव और बढ़ती राजनीतिक बेचैनी का सामना करना था.
80s की राजनीतिक कहानी यहीं से शुरू होती है।
1981: एक छोटे से कमरे से शुरू हुई IT क्रांति
Infosys की शुरुआत
आज भारत को दुनिया की IT powerhouse के रूप में देखा जाता है.
लेकिन इसकी कहानी किसी बड़े सरकारी कार्यक्रम से नहीं, बल्कि कुछ युवाओं के एक छोटे से entrepreneurial venture से शुरू हुई.
1981 में Infosys की स्थापना हुई.
तब भारत कैसा था?
यह वह दौर था जब:
- कंप्यूटर आम घरों से बहुत दूर थे
- सरकारी नियंत्रण और License Raj अर्थव्यवस्था पर हावी था
- private entrepreneurship के लिए रास्ते आसान नहीं थे
- software industry लगभग अनजान क्षेत्र थी
लेकिन इसी दौर में भारत में एक ऐसी industry का बीज पड़ा, जो आने वाले दशकों में लाखों नौकरियों और एक नए middle class के निर्माण में भूमिका निभाएगी.
80s का hidden revolution
आज के Bengaluru, IT jobs, software engineers और global Indian professional की कहानी को समझने के लिए 1981 को भूलना मुश्किल है.
एक दशक जो टीवी से शुरू होकर computer और software तक पहुंचने वाला था.
1982: जब भारत रंगीन हो गया
Asian Games + Colour TV
अगर 80s की कोई ऐसी याद है जिसे पूरा परिवार एक साथ महसूस कर सकता था, तो वह है—
Colour TV.
1982 के Asian Games ने भारत में रंगीन television broadcasting को बड़ा national moment बना दिया.
घर में पहली बार क्या बदला?
Black-and-white TV देखने वाली पीढ़ी के सामने अचानक दुनिया रंगीन हो गई.
Asian Games देखने के लिए television खरीदना एक family aspiration बन गया.
और यहीं से Doordarshan सिर्फ सरकारी प्रसारण सेवा नहीं रहा-
वह भारतीय परिवार का हिस्सा बनने लगा.
एक नया India
TV के साथ आया:
Advertisement → consumer culture → celebrities → serials → cricket → shared national experience
जिस भारत में मनोरंजन के लिए radio और cinema प्रमुख माध्यम थे, वहां television तेजी से सबसे ताकतवर mass medium बनने लगा.
याद रखिए...
1982 में भारत ने सिर्फ Asian Games नहीं देखे. भारत ने पहली बार महसूस किया कि television आने वाले वर्षों में देश की संस्कृति और राजनीति दोनों बदल सकता है.
1983: Cricket ने भारत को एक नया सपना दिया
Kapil Dev की टीम और World Cup
25 जून 1983.
Lord's के मैदान पर भारत ने West Indies को हराकर Cricket World Cup जीत लिया.
यह जीत सिर्फ एक trophy नहीं थी.
क्यों खास थी?
उस समय West Indies cricket की सबसे बड़ी ताकत थी.
भारत से ऐसी जीत की उम्मीद बहुत कम लोगों ने की थी.
लेकिन Kapil Dev की टीम ने इतिहास बदल दिया.
Mass memory:
आज भी उस दौर की तस्वीरें याद की जाती हैं. Kapil Dev trophy उठाए हुए... और भारत में cricket की लोकप्रियता एक नए स्तर पर पहुंचती हुई.
लेकिन 1983 की एक और कहानी
इसी वर्ष Maruti 800 भारतीय बाजार में आई.
एक तरफ क्रिकेट ने भारतीय सपनों को आसमान दिया.
दूसरी तरफ Maruti 800 ने middle-class परिवार के लिए अपनी car का सपना ज्यादा वास्तविक बनाया.
1984: भारत का सबसे बेचैन साल
अगर 1980s में किसी एक साल को भारत की collective memory में सबसे भारी कहा जाए, तो वह 1984 है.
जून 1984
पंजाब में बढ़ते उग्रवाद के बीच भारतीय सेना ने Operation Blue Star चलाया.
स्वर्ण मंदिर परिसर में सैन्य कार्रवाई ने पूरे देश को झकझोर दिया.
31 अक्टूबर 1984
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके ही सुरक्षा कर्मियों ने हत्या कर दी.
इसके बाद देश के कई हिस्सों में भयानक anti-Sikh violence हुई.
फिर आया दिसंबर...
2–3 दिसंबर की रात Bhopal में Union Carbide pesticide plant से जहरीली गैस का रिसाव हुआ.
हजारों लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में लोग लंबे समय तक स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावित हुए.
1984 इसलिए अलग है
एक ही साल में भारत ने देखा-
- आतंकवाद
- सैन्य कार्रवाई
- प्रधानमंत्री की हत्या
- साम्प्रदायिक हिंसा
- औद्योगिक त्रासदी
लेकिन इसी साल एक अलग तरह की उपलब्धि भी हुई.
'सारे जहां से अच्छा...'
अप्रैल 1984 में Rakesh Sharma अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय बने.
जब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उनसे पूछा कि अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है, तो उनका प्रसिद्ध जवाब था-
'सारे जहां से अच्छा.'
यानी 1984 सिर्फ त्रासदी नहीं था. यह भारत की असाधारण उपलब्धि और असाधारण पीड़ा, दोनों का साल था.
1985: आंदोलन से समझौते तक
Assam Accord
80s में सिर्फ Delhi की राजनीति नहीं बदल रही थी. भारत के अलग-अलग राज्यों में identity politics मजबूत हो रही थी.
असम में illegal immigration के सवाल पर लंबे समय से आंदोलन चल रहा था.
फिर आया 1985
राजीव गांधी सरकार और Assam Movement के नेताओं के बीच समझौते के बाद Assam Accord हुआ.
इसका महत्व
इसने तीन बड़े सवालों को national debate में मजबूती से ला दिया:
- कौन भारतीय है?
- कौन बाहर से आया है?
- और migration का राजनीतिक असर क्या होगा?
इन सवालों की गूंज बाद की भारतीय राजनीति में भी सुनाई देती रही.
एक और बदलाव
1985 में राजीव गांधी का भारत एक नई भाषा बोल रहा था: Computer, technology, modernization और young India.
पुरानी राजनीतिक व्यवस्था के बीच एक नई technological imagination जन्म ले रही थी.
1986: Shah Bano से Ram Janmabhoomi तक
1985 में Supreme Court ने Shah Bano को maintenance देने का फैसला सुनाया था.
1986 में Rajiv Gandhi सरकार ने Muslim Women (Protection of Rights on Divorce) Act पारित किया.
बहस क्या थी?
यह सिर्फ एक कानूनी मामला नहीं रहा.
देश में सवाल उठे-
- महिलाओं के अधिकार बनाम personal law?
- अदालत बनाम संसद?
- Secularism बनाम appeasement politics?
और उसी वर्ष...
फरवरी 1986 में अयोध्या के विवादित स्थल के ताले खोले गए.
इसके बाद Ram Janmabhoomi movement धीरे-धीरे national politics के केंद्र में आने लगा.
80s की politics बदल रही थी
जाति, धर्म, regional identity और personal law- अब ये मुद्दे सिर्फ political speeches का हिस्सा नहीं थे.
वे घरों की बातचीत का हिस्सा बनने लगे थे.
1987: रविवार सुबह पूरा भारत एक साथ बैठा
1982 में colour TV आया था. 1987 में television ने भारतीय समाज पर अपनी असली ताकत दिखाई.
Ramanand Sagar का Ramayan Doordarshan पर प्रसारित होना शुरू हुआ.
रविवार की सुबह...
कई घरों में TV के सामने परिवार जमा होता.
सड़कों पर सन्नाटा दिखता.
दुकानों और सार्वजनिक जगहों पर लोग episode देखने के लिए television के आसपास इकट्ठा होते.
यह सिर्फ serial नहीं था
Ramayan ने दिखाया कि television-
एक साथ करोड़ों लोगों को एक ही कहानी, एक ही पात्र और एक ही cultural moment से जोड़ सकता है.
1988: युवा भारत को मिला नया वोट
आज 18 साल की उम्र में भारतीय नागरिक vote कर सकता है.
लेकिन हमेशा ऐसा नहीं था.
1988 में 61st Constitutional Amendment के जरिए voting age को 21 से घटाकर 18 वर्ष किया गया.
इसका मतलब क्या था?
भारत की राजनीति में पहली बार बड़ी संख्या में युवा सीधे electoral democracy का हिस्सा बनने वाले थे.
यानी:
- College student → voter
- 18 साल → political voice
और उसी साल...
Rajiv Gandhi ने चीन की यात्रा की.
1962 के युद्ध के बाद भारत-चीन संबंध लंबे समय तक तनावपूर्ण रहे थे.
1988 की Rajiv Gandhi–Deng Xiaoping मुलाकात ने relations को normalise करने की दिशा में एक नया अध्याय खोला.
1988 का संदेश
एक तरफ भारत अपने युवाओं को राजनीतिक अधिकार दे रहा था.
दूसरी तरफ वह अपने सबसे महत्वपूर्ण पड़ोसी के साथ संबंध सुधारने की कोशिश कर रहा था.
भारत भविष्य की ओर देख रहा था.
1989: जिस साल पुरानी राजनीति हिल गई
1989 तक आते-आते 80s का political India बदल चुका था. राजीव गांधी 1984 में historic majority के साथ सत्ता में आए थे.
लेकिन पांच साल बाद तस्वीर अलग थी.
Bofors का असर
- Bofors deal से जुड़े आरोपों ने राजीव गांधी सरकार की credibility को बड़ा नुकसान पहुंचाया.
- 'Bofors' सिर्फ एक defence deal नहीं रहा-
- यह corruption और political accountability का national symbol बन गया.
1989 का चुनाव
- Congress सबसे बड़ी पार्टी तो रही, लेकिन उसका प्रभुत्व टूट गया.
- V.P. Singh प्रधानमंत्री बने.
- और यहीं से coalition era की जमीन मजबूत हुई.
लेकिन एक और संकट
1989 में Kashmir में militancy तेजी से गंभीर होने लगी.
- दिसंबर में Union Home Minister Mufti Mohammad Sayeed की बेटी Rubaiya Sayeed का kidnapping हुआ.
- यह घटना आने वाले दशक में Kashmir crisis की भयावह दिशा का एक बड़ा संकेत बनी.
80s की सबसे बड़ी कहानी
1980 से 1989 तक सिर्फ सरकारें नहीं बदलीं. भारत की पूरी social imagination बदलने लगी.
'भारत बदल रहा था, लेकिन उसे अभी पता नहीं था कि कितना.'
1980 में जिस भारत में television सीमित था, computer दुर्लभ था और Congress की राजनीति dominant थी.
वही भारत 1989 तक पहुंचते-पहुंचते-
TV देखने वाला, cricket को जुनून की तरह लेने वाला, Maruti का सपना देखने वाला, computer को भविष्य मानने वाला और identity तथा corruption जैसे मुद्दों पर राजनीतिक रूप से ज्यादा जागरूक समाज बन चुका था.
और शायद यही वजह है कि आज, दशकों बाद भी—
80s फिर trend कर रहा है.
क्योंकि 80s को याद करना सिर्फ nostalgia नहीं है. यह उस भारत को याद करना है, जहां से आज का भारत बनना शुरू हुआ.
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