Video : चलती ट्रेन में यात्रियों का अनोखा जुगाड़, एसी कोच को बना दिया थिएटर, वीडियो देख बोले लोग- ऐसा भी होता है क्या?

Passengers Turn AC Train Coach into Cinema hall : लंबी ट्रेन यात्रा को मजेदार बनाने के लिए यात्रियों ने एसी कोच को ही मिनी थिएटर में बदल दिया. खिड़की पर चादर टांगकर प्रोजेक्टर पर फिल्म देखने का यह तरीका खूब वायरल हो रहा है.

लंबे ट्रेन सफर में समय काटना कई बार मुश्किल हो जाता है. ऐसे में यात्री मोबाइल, किताब या बातचीत का सहारा लेते हैं. लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में कुछ यात्रियों ने टाइम पास का ऐसा तरीका खोज निकाला, जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया. यात्रियों ने ट्रेन के एसी कोच में ही प्रोजेक्टर लगाकर फिल्म देखने का इंतजाम कर लिया. अब यह वीडियो इंटरनेट पर चर्चा का विषय बना हुआ है.

खिड़की पर चादर टांगी और एसी कोच बन गया थिएटर

  • वायरल वीडियो में ट्रेन के एसी कोच के अंदर कुछ यात्रियों का समूह नजर आता है. उन्होंने सीटों के बीच प्रोजेक्टर रखा और ट्रेन की खिड़की के पास सफेद चादर टांग दी. इसके बाद चादर को स्क्रीन की तरह इस्तेमाल करते हुए फिल्म चला दी गई.
  • वीडियो में कुछ यात्री आराम से फिल्म देखते नजर आ रहे हैं. ट्रेन में आमतौर पर सुनाई देने वाली बातचीत और यात्रियों की आवाज के बीच इस तरह फिल्म देखने का इंतजाम काफी अलग नजर आता है.
  • यही वजह है कि वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से लोगों का ध्यान खींच रहा है. सोशल मीडिया में लोग इसे सिर्फ ‘चलता-फिरता सिनेमाघर’ बता रहे हैं.

क्या ट्रेन में ऐसा करना है कानूनी?

  • वीडियो सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ट्रेन के एसी कोच में इस तरह प्रोजेक्टर लगाकर फिल्म चलाना नियमों के मुताबिक है.
  • ट्रेन में किसी भी तरह की गतिविधि से यात्रियों की सुरक्षा, दूसरे यात्रियों को होने वाली परेशानी और रेलवे के नियम जुड़े होते हैं.
  • खासकर अगर प्रोजेक्टर, चादर या दूसरे सामान से रास्ता बाधित हो, तेज आवाज से दूसरे यात्रियों को परेशानी हो या कोच की व्यवस्था प्रभावित हो, तो मामला अलग हो सकता है.

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By गौतम कुमार

गौतम कुमार वर्तमान में प्रभात खबर से जुड़े पत्रकार हैं. वे राजनीति, इतिहास, साहित्य, खेल, कानून, लोक संस्कृति और मनोरंजन जैसे विविध विषयों पर लिखते हैं. किसी विषय पर रिपोर्टिंग या लेखन के दौरान उनका जोर केवल घटनाओं की जानकारी देने पर नहीं, बल्कि उसके पीछे की पृष्ठभूमि, सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ और उसके प्रभाव को समझाने पर रहता है.

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