पंडवानी की बुलंद आवाज हुई खामोश, प्रख्यात लोकगायिका तीजन बाई का निधन

छत्तीसगढ़ की मशहूर लोकगायिका और पंडवानी गायन को दुनियाभर में पहचान दिलाने वाली तीजन बाई का रविवार (5 जुलाई) को रायपुर एम्स में निधन हो गया. वह लंबे समय से बीमार थीं.

एम्स रायपुर के डॉक्टरों के मुताबिक, पद्म विभूषण से सम्मानित मशहूर लोकगायिका तीजन बाई ने रविवार तड़के करीब 3:15 बजे अंतिम सांस ली. वह 27 मई से अस्पताल में भर्ती थीं और लंबे समय से इलाज चल रहा था. दुर्ग जिले की रहने वाली तीजन बाई ने अपनी दमदार आवाज, शानदार मंच प्रस्तुति और भावपूर्ण अंदाज से पंडवानी गायन को देश ही नहीं, दुनिया भर में नई पहचान दिलाई.

पंडवानी छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककला है, जिसमें महाभारत की कहानियों को गीत, संगीत और दमदार अंदाज में सुनाया जाता है. तीजन बाई ने अपनी अनोखी प्रस्तुति से इस लोककला को दुनिया भर में पहचान दिलाई. उनके कार्यक्रमों ने देश-विदेश के लोगों का दिल जीता और उन्हें देश के सबसे सम्मानित लोक कलाकारों में शामिल कर दिया. भारतीय लोककला में उनके अमूल्य योगदान के लिए तीजन बाई को भारत सरकार ने पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया. 

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने तीजन बाई के निधन पर गहरा दुख जताया. उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने अपनी कला से छत्तीसगढ़ का नाम पूरे देश और दुनिया में रोशन किया. मुख्यमंत्री ने उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा.

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि मशहूर पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन से बहुत दुख हुआ है. उन्होंने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से छत्तीसगढ़ की लोक कला को दुनिया भर में एक खास पहचान दिलाई. उनका जाना कला और संस्कृति की दुनिया के लिए एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती. दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं. ओम शांति…

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By Amitabh Kumar

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अमिताभ 1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है.

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