'कोरोना वायरस महामारी में लाखों विस्थापित परिवारों और उनके बच्चों की स्थिति नाजुक'

पूरी दुनिया समेत इस समय भारत कोविड-19 महामारी के प्रकोप से जूझ रहा है. हालांकि, भारत समेत पूरी दुनिया में इस महामारी से प्रभावितों की संख्या अधिक है, लेकिन फिलहाल संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) की रिपोर्ट पर यकीन करें, तो भारत समेत पूरी दुनिया में कोरोना वायरस से खतरनाक तरीके से प्रभावित होने वालों में इन विस्थापितों का परिवार भी है.

नयी दिल्ली : पूरी दुनिया समेत इस समय भारत कोविड-19 महामारी के प्रकोप से जूझ रहा है. हालांकि, भारत समेत पूरी दुनिया में इस महामारी से प्रभावितों की संख्या अधिक है, लेकिन फिलहाल संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) की रिपोर्ट पर यकीन करें, तो भारत समेत पूरी दुनिया में कोरोना वायरस से खतरनाक तरीके से प्रभावित होने वालों में इन विस्थापितों का परिवार भी है. यूनिसेफ की रिपोर्ट में इस बात का स्पष्ट तरीके से खुलासा किया गया है कि वर्ष 2019 के दौरान भारत में प्राकृतिक आपदा, आपसी संघर्ष और हिंसा की वजह से करीब 50 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो गए. इन विस्थापितों में अबोध बच्चे भी शामिल हैं. रिपोर्ट यह साफ तौर पर कहती है कि कोविड-19 महामारी के दौर में विस्थापित लाखों परिवारों और उनके बच्चों की स्थिति नाजुक बनी हुई है.

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यदि यूनिसेफ की रिपोर्ट के आधार पर अकेले भारत में 2019 के दौरान प्राकृतिक आपदाओं, संघर्ष और हिंसा के चलते 50 लाख से ज्यादा लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हुए. संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि के दौरान विश्व में आंतरिक रूप से हुए नये विस्थापनों की यह सबसे बड़ी संख्या थी. भारत के बाद फिलीपीन, बांग्लादेश और चीन में सबसे अधिक लोग विस्थापितों की संख्या में शरीक हुए. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) द्वारा प्रकाशित ‘लॉस्ट एट होम’ रिपोर्ट में कहा गया कि 2019 में करीब 3.3 करोड़ नये विस्थापन रिकॉर्ड किये गये, जिनमें से 2.5 करोड़ विस्थापन प्राकृतिक आपदा के कारण और 85 लाख विस्थापन संघर्ष एवं हिंसा का परिणाम थे. इनमें से 1.2 करोड़ नये विस्थापनों में बच्चे थे, जिनमें से 38 लाख बच्चे संघर्ष एवं हिंसा के कारण विस्थापित हुए और 82 लाख बच्चे मौसम संबंधी आपदाओं के चलते विस्थापित हुए.

रिपोर्ट में कहा गया है कि संघर्ष एवं हिंसा की तुलना में प्राकृतिक आपदाओं के कारण ज्यादा विस्थापन हुए. 2019 में करीब एक करोड़ नये विस्थापन पूर्वी एशिया और प्रशांत (39 प्रतिशत) में हुए, जबकि इतनी ही संख्या (95 लाख) में विस्थापन दक्षिण एशिया में भी हुए. इसमें कहा गया है कि भारत, फिलीपीन, बांग्लादेश और चीन सभी को प्राकृतिक आपदाएं झेलनी पड़ीं. नतीजतन, लाखों लोग विस्थापित हुए, जो वैश्विक आपदा के कारण हुए विस्थापनों का 69 फीसदी है. यह खतरनाक तूफान एवं बाढ़ के कारण उत्पन्न अत्यंत प्रतिकूल मौसमी स्थितियों के कारण हुआ.

इसके साथ ही, इसमें यह भी कहा गया है कि दुनिया भर में आपदा के कारण हुए करीब 82 लाख विस्थापन बच्चों से जुड़े हुए हैं. भारत में 2019 के दौरान नये आंतरिक विस्थापनों की कुल संख्या 50,37,000 रही, जिसमें 50,18,000 प्राकृतिक आपदाओं के कारण और 19,000 लोगों का विस्थापन संघर्ष एवं हिंसा के चलते हुआ. वहीं, फिलीपीन में प्राकृतिक आपदाओं, संघर्ष एवं हिंसा के चलते 42.7 लाख लोग भीतरी रूप से विस्थापित हुए, जबकि बांग्लादेश में यह संख्या 40.8 लाख और चीन में 40.3 लाख थी.

रिपोर्ट में कहा गया कि आज पहले से कहीं ज्यादा बच्चे अपने ही देश में विस्थापित हो गए. 2019 के अंत तक कुल 4.6 करोड़ लोग संघर्ष एवं हिंसा के कारण आंतरिक रूप से विस्थापित हुए. इसमें कहा गया है कि करीब 1.9 करोड़ बच्चे 2019 में संघर्ष एवं हिंसा के चलते अपने ही देश के भीतर विस्थापित हो गए, जो किसी भी अन्य साल के मुकाबले ज्यादा हैं और यह उन्हें कोविड-19 के वैश्विक प्रसार के प्रति ज्यादा संवेदनशील बनाता है.

संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने कहा कि कोविड-19 वैश्विक महामारी नाजुक स्थिति को और बुरी बना रही है. इसने कहा कि अपने घरों एवं समुदायों से बाहर हुए ये बच्चे विश्व में सर्वाधिक संवेदनशील लोगों में से एक हैं. कोविड-19 वैश्विक महामारी उनके जीवन के लिए और ज्यादा नुकसान एवं अनिश्चितता लेकर आयी है. शिविर या अनौपचारिक बसावटें अक्सर भीड़-भाड़ वाली होती हैं और उनमें पर्याप्त साफ-सफाई एवं स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव रहता है. सामाजिक दूरी अमूमन संभव नहीं हो पाती, जिससे ऐसी स्थितियां उत्पन्न होती हैं, जो बीमारी के प्रसार के अत्यंत अनुकूल हैं.

यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक हेनरीटा फोर ने कहा कि कोविड-19 वैश्विक महामारी जैसे जब नये संकट उभरते हैं, तब ये बच्चे खासकर संवेदनशील होते हैं. उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि सरकारें और मानवीय कार्यों के साझेदारी के साथ काम कर उन्हें सुरक्षित एवं सेहतमंद रखे. रिपोर्ट में आंतरिक रूप से विस्थापित बच्चों के सामने आने वाले खतरों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इनमें बाल श्रम, बाल विवाह, बाल तस्करी आदि शामिल हैं और बच्चों को संरक्षित करने के लिए तत्काल कदम उठाया जाना जरूरी है.

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