दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि मां की सर्जरी को देखते हुए उमर खालिद को एक जून से तीन जून तक अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाएगा.
सामाजिक कार्यकर्ता उमर खालिद ने 21 मई को अधीनस्थ अदालत के उस आदेश के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था जिसमें उसकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी. अधीनस्थ अदालत ने दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाकों में फरवरी 2020 के दंगों के पीछे ‘बड़ी साजिश’ के संबंध में आतंकवाद-रोधी कानून (यूएपीए) के तहत दर्ज एक मामले के मद्देनजर यह याचिका खारिज कर दी थी.
15 दिन की अंतरिम जमानत देने का अनुरोध किया था उमर खालिद ने
उमर खालिद ने अधीनस्थ अदालत से अपने चाचा के मरणोपरांत 40 दिन तक चलने वाले अंतिम संस्कार (चेहलुम) में शामिल होने और अपनी मां की देखभाल करने के लिए 15 दिन की अंतरिम जमानत देने का अनुरोध किया था. याचिका में कहा गया है कि उसकी मां की सर्जरी होनी है. हालांकि, अधीनस्थ अदालत ने राय जाहित करते हुए कहा कि उसका दिवंगत चाचा के अंतिम संस्कार में शामिल होना ‘इतना जरूरी नहीं’ है और उनकी मां की देखभाल के लिए परिवार के अन्य सदस्य उपलब्ध हैं.
फरवरी 2020 में हुए दंगों के मामले में जेल में हैं उमर
फरवरी 2020 में हुए दंगों के ‘मुख्य साजिशकर्ताओं’ में से एक होने के कारण खालिद पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया था. इन दंगों में 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक घायल हुए थे. यह हिंसा नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए), 2019 और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के विरोध में प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी.
सामाजिक कार्यकर्ता शरजील इमाम, खालिद सैफी और आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत अन्य लोगों पर भी इस ‘बड़े षड्यंत्र’ मामले में कथित संलिप्तता के आरोप में मामला दर्ज किया गया है, जिसकी जांच दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल कर रही है.
