Uddhav Thackeray: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में जारी राजनीतिक संकट और सांसदों की बगावत के बीच पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भावुक अपील की. मुंबई में पार्टी के 60वें स्थापना दिवस समारोह में उन्होंने कहा कि यदि पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को उन पर भरोसा नहीं है तो वह पार्टी प्रमुख का पद छोड़ने के लिए तैयार हैं. उद्धव ठाकरे ने कहा- यदि आपको मुझ पर भरोसा और विश्वास नहीं है, तो मैं पार्टी प्रमुख का पद छोड़ने को तैयार हूं. किसी को भी शिवसेना का अध्यक्ष बना दीजिए.
देश एक पार्टी, बिना चुनाव की ओर बढ़ रहा है- उद्धव
अपने संबोधन में उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि देश एक ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, जहां केवल एक पार्टी रह जाएगी और चुनावों का महत्व खत्म हो जाएगा. उन्होंने कहा- देश ‘एक पार्टी, बिना चुनाव’ की दिशा में बढ़ रहा है. यह लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है.
बागी सांसदों के लिए मतदाताओं से मांगी माफी
पार्टी के छह सांसदों की ओर से नेतृत्व से दूरी बनाने के बीच उद्धव ठाकरे ने उन मतदाताओं से भी माफी मांगी जिन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में इन सांसदों को वोट दिया था. उन्होंने कहा कि यदि वह लगातार शिवसैनिकों और जनता के बीच नहीं जाते, तो पार्टी चुनावों में इतनी सफलता हासिल नहीं कर पाती. उद्धव ने दावा किया कि कार्यकर्ताओं में निराशा नहीं बल्कि उत्साह है और शिवसेना की विचारधारा पहले से अधिक मजबूत है.
कांग्रेस में विलय की अटकलों को किया खारिज
पार्टी के कांग्रेस में विलय की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना ने 30 सालों तक भाजपा के साथ गठबंधन में रहने के बावजूद कभी विलय नहीं किया, तो कांग्रेस के साथ विलय का सवाल ही नहीं उठता.
छह सांसदों की बगावत से बढ़ा संकट
शिवसेना (UBT) बीते चार सालों में दूसरी बार बड़ी बगावत का सामना कर रही है. पार्टी के छह सांसद- संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाखचौरे, नागेश पाटिल-आष्टीकर और ओमप्रकाश राजे निंबालकर- महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं. इन सांसदों ने बीते गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित पार्टी की संसदीय दल की बैठक में हिस्सा नहीं लिया, जिसके बाद उनके पाला बदलने की अटकलें तेज हो गईं.
भाजपा पर साजिश का आरोप
इसी कड़ी में शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता अंबादास दानवे ने पार्टी में जारी बगावत के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने आरोप लगाया कि एनडीए की संख्या बढ़ाकर परिसीमन संबंधी विधेयक पारित कराना चाहती है. दानवे ने दावा किया- इस पूरी योजना के पीछे भाजपा है, जबकि एकनाथ शिंदे को केवल चेहरा बनाया गया है. भाजपा को 2029 के लोकसभा चुनाव में संभावित हार का डर है, इसलिए वह सांसदों को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है. हालांकि भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि अन्य दलों के आंतरिक मामलों से उसका कोई संबंध नहीं है.
संजय राउत का बड़ा दावा
शिवसेना (BUT) के राज्यसभा सांसद और प्रवक्ता संजय राउत ने भी बागी सांसदों को लेकर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने दावा किया कि बागी सांसदों के बीच केंद्रीय मंत्री पद को लेकर मतभेद है. राउत ने कहा- छह सांसदों में से केवल एक ही मंत्री बन सकता है. इसलिए यह समझौता हुआ है कि जिन्हें मंत्री पद नहीं मिलेगा, उन्हें अतिरिक्त 25 करोड़ रुपये दिए जाएंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी छोड़ने वाले सांसदों को सत्ता पक्ष की ओर से विभिन्न प्रकार के प्रलोभन दिए जा रहे हैं.
