तमिलनाडु में विजय को अबतक नहीं मिला सरकार बनाने का न्यौता, कांग्रेस का 8 मई को विरोध प्रदर्शन

Vijay TVK : तमिलनाडु में नई सरकार के गठन का रास्ता अबतक साफ नहीं हुआ है, इसकी वजह यह है कि टीवीके के पास सरकार बनाने के लिए पर्याप्त बहुमत नहीं है. इसी वजह से राज्यपाल ने उन्हें अबतक सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया है, क्योंकि राज्यपाल इस बात को पुख्ता कर लेना चाहते हैं कि जो सरकार बनेगी वह स्थिर रहेगी. कांग्रेस और टीवीके दोनों ही राज्यपाल के इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं और उनका कहना है कि सरकार का बहुमत सदन में तय होगा, राज्यपाल भवन में नहीं.

TVK vijay: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बाद भी टीवीके (Tamilaga Vettri Kazhagam) को अबतक राज्यपाल द्वारा सरकार बनाने का न्यौता नहीं दिये जाने पर कांग्रेस ने शुक्रवार 8 मई को तमिलनाडु के सभी जिला हेडक्वार्टर में विरोध प्रदर्शन करने की अपील की है.

बीजेपी सरकार और गवर्नर की निंदा की

तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के प्रेसिडेंट के सेल्वापेरुंथगई ने 7 मई को एक पत्र जारी कर विरोध प्रदर्शन की जानकारी दी. उन्होंने केंद्र की बीजेपी सरकार और गवर्नर की निंदा की और कहा कि वे टीवीके को सरकार बनाने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. यह संविधान के अनुसार सही नहीं है. उन्होंने कहा कि 2026 के विधानसभा चुनाव में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है, इसलिए उसे सरकार बनाने का पूरा अधिकार है.

बहुमत विधानसभा में तय होगा, लोकभवन में नहीं

टीवीके को चुनाव में 108 सीटें मिली हैं,जबकि बहुमत का जादुई आंकड़ा 118 है. इसका अर्थ यह है कि टीवीके बहुमत से 10 नंबर पीछे है. उसने कम्युनिस्ट पार्टी सहित कुछ और छोटे दलों को समर्थन के लिए पत्र भेजा है. अभी की स्थिति में टीवीके के पास 112 सांसदों का समर्थन है और उसे बहुमत के लिए 5 और सांसदों का समर्थन चाहिए.न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार टीवीके ने राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर को 112 सांसदों के समर्थन का पत्र भी सौंपा है, बावजूद इसके उन्हें सरकार बनाने का निमंत्रण अबतक नहीं मिला है. इस मसले पर तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी ने कहा है कि सरकार के पास बहुमत है या नहीं इसका फैसला विधानसभा में होता है राज्यपाल भवन में नहीं.

जब किसी पार्टी के पास बहुमत नहीं, तो टीवीके को मौका मिले


वरिष्ठ पत्रकार और राज्यसभा के सांसद कपिल सिब्बल ने कहा है कि इस समय किसी एक पार्टी के पास मेजॉरिटी नहीं है. ऐसे में आम तौर पर सबसे बड़ी पार्टी को, भले ही उसके पास मेजॉरिटी न हो, सरकार बनाने के लिए कहा जाना चाहिए. गवर्नर यह टेस्ट नहीं कर सकते कि किसके पास मेजॉरिटी है. वे सबसे बड़ी पार्टी और उस पार्टी के लीडर को सरकार बनाने के लिए कहें, फिर वह TVK को हाउस में अपनी मेजॉरिटी दिखाने के लिए समय देंगे. यहां हो यह रहा है कि गवर्नर समय खरीदना चाहते हैं और यह पक्का करना चाहते हैं कि बीजेपी चुनावी प्रोसेस में हेरफेर कर सके और किसी तरह TVK को सरकार बनाने से रोक सके

टीवीके जल्दी बनाना चाहती है सरकार

टीवीके के नेता यह चाहते थे कि विजय जल्दी से जल्दी मुख्यमंत्री पद की शपथ ले लें, उनके साथ कुछ और लोग भी शपथ ले लेते और राज्यपाल से दो हफ्ते का समय मांग कर बहुमत साबित कर दिया जाता. अब जबकि राज्यपाल ने सरकार बनाने का न्यौता नहीं दिया है, टीवीके की योजना फंस गई है.

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Published by: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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