Tripura Assembly Election: त्रिपुरा में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार, टिपरा मोथा बन सकती है किंगमेकर, समझें गणित

शाही परिवार के पूर्व वंशज प्रद्योत माणिक्य देबबर्मा के नेतृत्व वाले टिपरा मोथा ने भाजपा या कांग्रेस और वाम मोर्चे के साथ गठबंधन करने से मना कर दिया, लेकिन उसने ग्रेटर टिपरालैंड के अलग राज्य की उसकी मांग का समर्थन करने वाले किसी भी दल के साथ चुनाव बाद गठबंधन किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया.

त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावना जतायी जा रही है. जबकि नवगठित राजनीतिक दल टिपरा मोथा के किंगमेकर के रूप में उभरने के सामने आने की उम्मीद भी की जा रही है. इस चुनाव में मुख्य रूप से मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-इंडिजेनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) गठबंधन, कांग्रेस-वाम मोर्चा गठबंधन और टिपरा मोथा के बीच होगा.

टिपरा मोथा ने बीजेपी और कांग्रेस के साथ गठबंधन से किया इनकार

शाही परिवार के पूर्व वंशज प्रद्योत माणिक्य देबबर्मा के नेतृत्व वाले टिपरा मोथा ने भाजपा या शत्रु से मित्र बनी कांग्रेस और वाम मोर्चे के साथ गठबंधन करने से मना कर दिया, लेकिन उसने ग्रेटर टिपरालैंड के अलग राज्य की उसकी मांग का समर्थन करने वाले किसी भी दल के साथ चुनाव बाद गठबंधन किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया.

टिपरा मोथा अकेले दम पर लड़ेगी चुनाव

टिपरा मोथा ने त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएएडीसी) के लिए 2021 में हुए चुनावों में शानदार प्रदर्शन कर निकाय की 30 में से 18 सीट हासिल की थीं. टिपरा मोथा ने विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने का फैसला किया है और उसे 20 जनजातीय बहुल सीट पर जीत की उम्मीद है. कुल 60 सदस्यीय विधानसभा वाले पूर्वोत्तर राज्य में ये सीटें बहुत अहम होंगी.

भाजपा ने 55 उम्मीदवार उतारे मैदान पर

सत्तारूढ़ भाजपा ने 55 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है और अपनी सहयोगी आईपीएफटी के लिए मात्र पांच सीट छोड़ी हैं. गठबंधन सहयोगी गोमती जिले की अम्पीनगर विधानसभा सीट पर दोस्ताना चुनावी जंग लड़ेंगे, क्योंकि 16 फरवरी को होने वाले चुनावों में आईपीएफटी कुल छह निर्वाचन क्षेत्रों में भाग्य आजमाएगी.

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2018 चुनाव में भाजपा-आईपीएफटी गठबंधन ने वाम मोर्चे के 25 साल लंबे शासन को किया समाप्त

भाजपा-आईपीएफटी गठबंधन ने 2018 के विधानसभा चुनावों में वाम मोर्चे के 25 साल लंबे शासन को समाप्त कर दिया था. भाजपा ने 10 एसटी (अनुसूचित जनजाति) आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों सहित 36 सीट पर जीत हासिल की थी, जबकि इसके गठबंधन सहयोगी को आठ सीट पर जीत मिली थी.

टिपरा मोथा की बढ़ रही लोकप्रियता

पर्यवेक्षकों का मानना है कि टिपरा मोथा की लोकप्रियता न केवल इसलिए बढ़ी, क्योंकि उसने अलग राज्य की मांग उठाई, बल्कि इसलिए भी बढ़ी, क्योंकि जनजातीय समुदाय के लोग तत्कालीन शाही परिवार का अब भी सम्मान करते हैं और वे प्रद्योत देबबर्मा को ‘बुबागरा’ या राजा कहकर संबोधित करते हैं.

क्या है भाजपा का दावा

भाजपा नेता और चुनावी रणनीतिकार बलई गोस्वामी ने कहा कि त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति में भाजपा के पास टिपरा मोथा और कांग्रेस-वाम मोर्चा गठबंधन के मुकाबले बढ़त होगी, क्योंकि भाजपा विरोधी वोट उनके बीच विभाजित हो जाएंगे.

क्या है कांग्रेस-वाम गठबंधन का दावा

माकपा के वरिष्ठ नेता पबित्रा कार ने कहा कि टिपरा मोथा और भाजपा के बीच लड़ाई से कांग्रेस-वाम गठबंधन को फायदा होने की उम्मीद है, क्योंकि भाजपा के सहयोगी आईपीएफटी ने पहाड़ियों में अपनी ताकत खो दी है, लेकिन माकपा के जनजातीय क्षेत्रों में अब भी वफादार समर्थक हैं.

टिपरा मोथा बोले उनकी पार्टी बनेगी किंगमेकर

टिपरा मोथा के प्रवक्ता एंथनी देबबर्मा ने कहा कि उनकी पार्टी कम से कम 25-26 सीटें जीतकर ‘किंगमेकर’ बनकर उभरेगी. गौरतलब है कि त्रिपुरा विधानसभा के लिए मतदान 16 फरवरी को होगा और मतगणना दो मार्च को की जाएगी.

माकपा अकेले 43 सीट पर लड़ेगी चुनाव

माकपा अकेले 43 सीट पर चुनाव लड़ेगी, जबकि वाम मोर्चा के अन्य घटक-फॉरवर्ड ब्लॉक, आरएसपी और भाकपा, एक-एक सीट पर उम्मीदवार खड़े करेंगे. वाममोर्चा के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ रही कांग्रेस ने 13 सीट पर उम्मीदवार उतारे हैं. टिपरा मोथा ने 42 सीट पर उम्मीदवार खड़े किए हैं। तृणमूल कांग्रेस 28 सीट पर किस्मत आजमाएगी, जबकि 58 निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनावी मैदान में हैं.

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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