गणतंत्र दिवस के दिन किसानों की ओर से ट्रैक्टर रैली में भारी हिंसा की गयी. जिससे नुकसान की खबरें आ रही हैं. हिंसा में 300 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए. शांतिपूर्ण मार्च निकालने की बात करने वाले प्रदर्शनकारी किसानों ने ऐतिहासिक लाल किले में कुछ देर तक बवाल काटा. किसान इतने हिंसक हो चुके थे कि वो पुलिसवालों के काफी समझाने के बावजूद नहीं माने और लगातार बवाल करते गये. किसानों के हमले में घायल हुए DCP उत्तर के ऑपरेटर संदीप ने बताया कि कई हिंसक लोग अचानक लाल किला पहुंच गए.
नशे में धुत किसान या वे जो भी थे, उन पर अचानक तलवार, लाठी और अन्य हथियारों से हमला किया. स्थिति बिगड़ रही थी और हिंसक भीड़ को नियंत्रित करना हमारे लिए बहुत मुश्किल था.
वहीं किसानों के हमले में घायल हुए मोहन गॉर्डन के SHO बलजीत सिंह ने बताया कि नजफगढ़ रोड पर हमने बैरिकेड से रास्ता रोका था. किसान प्रदर्शनकारी ट्रैक्टर लेकर नजफगढ़ की तरफ से आए. उन्होंने बैरिकेड तोड़ दिया और पथराव शुरू कर दिया. वे बहुत हिंसक थे और उनके पास हर तरह के हथियार थे. कई ने शराब भी पी थी.
दिल्ली हिंसा मामले में अब तक दिल्ली पुलिस ने करीब 200 लोगों को हिरासत में लिया है. इसके अलावा अब तक 22 एफआईआर भी दर्ज किये गये हैं. एफआईआर में किसान नेता दर्शन पाल, राजिंदर सिंह, बलबीर सिंह राजेवाल, बूटा सिंह बुर्जगिल और जोगिंदर सिंह उग्रा के नाम है. FIR में BKU के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का भी नाम है.
ट्रैक्टर रैली में हिंसा पर किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा के पीछे कुछ असामाजिक तत्व थे. उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस की ‘कार्रवाइयों’ के कारण कुछ असामाजिक तत्व परेड में शामिल हो गए और यह हिंसा का कारण बना.
भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने एक बयान में यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने परेड के पहले से तय मार्गों के कुछ स्थानों पर गलत तरीके से बैरिकेड लगाए थे. टिकैत ने कहा, यह जानबूझकर किसानों को बरगलाने के लिए किया गया था, इस वजह से ट्रैक्टरों पर किसान भटक गए. उन्होंने दावा किया कि इससे असामाजिक तत्वों को ट्रैक्टर परेड में प्रवेश का मौका मिला. उन्होंने कहा कि बीकेयू शांतिपूर्ण प्रदर्शन में विश्वास करता है और हिंसा के पीछे उपद्रवियों की पहचान करेगा.
Posted By – Arbind kumar mishra
