विजय थलापति ने तमिलनाडु की राजनीति का बदला रंग, द्रविड़ पहचान पर हावी हुआ विकास का सपना

Tamil Nadu Election Results : एक्टर विजय अपने फिल्मों में भ्रष्टाचार का विरोध करते हैं और आम जनता के हितों की बात करते हुए उन्हें एक सुंदर जीवन देने की चाह रखते हैं. उनका यही सपना जब राजनीति में एंट्री लेता है, तो तमिलनाडु में राजनीति की हवा बदल जाती है और द्रविड़ पहचान पर आम जनता का हित भारी दिखता है. 1967 के बाद तमिलनाडु की राजनीति एक बार फिर बदल रही है.

Tamil Nadu Election Results : तमिलनाडु विधानसभा चुनाव का परिणाम बहुत ही चौंकाने वाला है. एक्टर विजय की पार्टी टीवीके ने जिस तरह रूझानों में बढ़त बनाई है और डीएमके का जो हाल हुआ है, उसकी उम्मीद नहीं थी. हालांकि एग्जिट पोल ने टीवीके की उपस्थिति को भांप लिया था और एक्सिस माई इंडिया ने तो यहां तक कहा था कि टीवीके तमिलनाडु में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरेगी.

तमिलनाडु की राजनीति में डीएमके ने किया था बड़ा बदलाव

तमिलनाडु की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव की ओर जाती दिख रही है. तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव 1967 में हुआ था जब पहली बार डीएमके ने कांग्रेस को हराया था और सीएन अन्नादुरई के नेतृत्व में सरकार बनाई थी. उस वक्त डीएमके को 138 सीटें मिलीं थी. यह दौर था एक क्षेत्रीय पार्टी के उभार का. डीएमके के उभार के साथ ही तमिलनाडु में द्रविड़ पहचान की राजनीति शुरू हुई थी. द्रविड़ पहचान, भाषा और संस्कृति से कनेक्ट का एक नया दौर शुरू हुआ था. हिंदी का विरोध हुआ था और यह कहा गया था कि हिंदी तमिलों पर थोपी जा रही है. उस वक्त ओबीसी और दलितों की राजनीति भी प्रदेश में शुरू हुई थी.

टीवीके ने आम जनता के मुद्दों से चलाई परिवर्तन की हवा

एक्टर विजय ने जब टीवीके (Tamilaga Vettri Kazhagam) की स्थापना की और आम जनता के मुद्दों को लेकर विधानसभा चुनाव में एंट्री मारी, तो सबको यही लगा कि तमिलनाडु की राजनीति में यह सबकुछ नहीं चलता है. यहां तो द्रविड़ पहचान और उनकी भाषा से जुड़े मुद्दों को उठाने वाली पार्टी की चुनाव जीतती है, लेकिन विजय इस पहचान से अलग राजनीति कर रहे थे. विजय ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बात की और DMK–AIADMK पर अप्रत्यक्ष हमला करते हुए सिस्टम बदलने की बात की. उन्होंने युवाओं की शिक्षा, रोजगार की बात की. वे राजनीति में युवाओं की भागीदारी की बात करते हैं. साथ ही वे हिंदी विरोध पर उतना जोर नहीं देते हैं. वे सुशासन पर फोकस करते हैं, जो भ्रष्टाचार से मुक्त हो. सामाजिक समानता की बात करते हैं. विजय भविष्य की राजनीति कर रहे हैं, जो विकास पर आधारित है. विजय, बीजेपी विरोध की बात नहीं करते.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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