Crime News : पत्नी की हत्या के जुर्म में 18 महीने जेल, जिंदा मिली पत्नी तो…होश उड़ा देगी सुरेश की कहानी

Crime News : कर्नाटक के सुरेश ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. उन्होंने पत्नी की झूठी हत्या के आरोप में 18 महीने जेल में बिताए. अब उन्होंने इस अन्याय के लिए 5 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की है. ऐसा इसलिए क्योंकि उनकी पत्नी बाद में जिंदा पाई गई. इस कहानी की चर्चा पूरे देश में अब होने लगी है. पढ़ें यहां पूरा माजरा आखिर है क्या?

Crime News : वह कर्नाटक के कोडागु के मजदूर कुरुबारा सुरेश की अजब कहानी सामने आई है. उनकी पत्नी मल्लिगे 2021 में लापता हो गई थीं. इसके एक साल बाद मैसूर के बेट्टदपुरा थाना क्षेत्र में कुछ कंकाल के अवशेष मिले. पुलिस को शक हुआ कि ये अवशेष मल्लिगे के हैं. इसके बाद क्या था, पुलिस ने बिना DNA जांच की पुष्टि के कथित रूप से सुरेश और उसकी सास गौरी पर दबाव बनाकर अवशेषों की मल्लिगे के रूप में पहचान करवाई. इसके बाद सुरेश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.

DNA टेस्ट से स्पष्ट हो गया कि अवशेष मल्लिगे के नहीं थे

सुरेश करीब 18 महीने तक जेल में रहा. बाद में कोर्ट द्वारा कराए गए DNA टेस्ट से स्पष्ट हो गया कि अवशेष मल्लिगे के नहीं थे. रिहाई के बाद सुरेश के दोस्तों ने मल्लिगे को मडिकेरी के एक रेस्टोरेंट में जीवित और स्वस्थ देखा. इसके बाद मामले ने अलग ही मोड़ ले लिया. जमानत पर रिहा होने के डेढ़ साल बाद भी ग्रामीणों, रिश्तेदारों और यहां तक कि उनके दो बच्चों को भी लगता था कि उन्होंने अपनी पत्नी की हत्या की है. किसी ने भी उनकी दलीलों पर विश्वास नहीं किया. जब उनकी पत्नी के जिंदा होने की बात सामने आई तो सब चकित रह गए.

सुरेश ने मांगा 5 करोड़ का मुआवजा

सुरेश के दोस्तों ने इस साल 1 अप्रैल को एक रेस्टोरेंट में अपने प्रेमी गणेश के साथ दोपहर का भोजन करते हुए मल्लिगे को जीवित देख लिया. मल्लिगे के जिंदा पाए जाने के बाद सत्र न्यायालय ने सुरेश को बरी कर दिया और कर्नाटक सरकार को मुआवजे के रूप में 1 लाख रुपये देने का आदेश दिया. 18 महीने की जेल और अपूरणीय मानसिक, आर्थिक और सामाजिक आघात के लिए केवल एक लाख से सुरेश खुश नहीं था. सुरेश ने जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई और 5 करोड़ का मुआवजा मांगा. इसके लिए उसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

असंतुष्ट सुरेश ने हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दायर की है. उन्होंने 5 करोड़ रुपये हर्जाने की मांग के साथ-साथ उन्हें फंसाने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की भी मांग की है.

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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