जमानत नियम-जेल अपवाद… उमर खालिद को UAPA में बेल न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, अपने ही फैसले पर की टिप्पणी

Supreme Court Umar Khalid UAPA: सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद को जमानत न देने वाले पुराने फैसले पर सवाल उठाए हैं. कोर्ट ने कहा कि UAPA मामलों में भी लंबे समय तक जेल और ट्रायल में देरी जमानत का आधार हो सकती है.

Supreme Court Umar Khalid UAPA: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पूर्व जेएनयू छात्र नेता उमर खालिद को जमानत देने से जुड़े पुराने फैसले पर गंभीर सवाल उठाए. अदालत ने कहा कि पहले दिए गए फैसले में उस सिद्धांत का सही तरीके से पालन नहीं किया गया, जिसमें लंबे समय तक जेल में रहने और ट्रायल में देरी को जमानत का आधार माना गया था. अदालत ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता संविधान का अहम हिस्सा है और UAPA मामलों में भी ‘जमानत नियम है, जेल अपवाद’ का सिद्धांत लागू होता है.

छह साल से जेल में बंद आरोपी को मिली राहत

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ एक अलग UAPA मामले में सुनवाई कर रही थी. यह मामला सैयद इफ्तिखार अंद्राबी से जुड़ा था, जो कथित आतंकी फंडिंग मामले में छह साल से ज्यादा समय से जेल में बंद हैं. सुनवाई के दौरान अदालत ने उन्हें जमानत दे दी और इसी दौरान उमर खालिद मामले पर भी टिप्पणी की.

कोर्ट ने पुराने फैसले पर जताई असहमति

पीठ ने जनवरी 2026 में आए उस फैसले का जिक्र किया, जिसमें उमर खालिद और शर्जील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया गया था. कोर्ट ने कहा कि वह उस फैसले में अपनाए गए दृष्टिकोण से सहमत नहीं है. जस्टिस उज्जल भुइयां ने अपने फैसले में कहा कि छोटी पीठ को बड़ी पीठ के फैसले का पालन करना जरूरी होता है. यदि किसी फैसले पर संदेह हो तो मामले को बड़ी पीठ के पास भेजा जाना चाहिए.

2021 के केए नजीब फैसले का दिया हवाला

सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2021 के चर्चित केए नजीब जजमेंट फैसले का हवाला दिया. उस निर्णय में कहा गया था कि यदि किसी आरोपी का ट्रायल लंबे समय तक शुरू नहीं होता और वह लंबे समय से जेल में है, तो उसे जमानत दी जा सकती है, भले ही मामला UAPA के तहत ही क्यों न हो. कोर्ट ने कहा कि नजीब मामले के निर्णय से पता चलता है कि समय बीतने के बाद आरोपी अपने आप रिहाई का हकदार होता है.  

कोर्ट ने ‘टू-प्रॉन्ग टेस्ट’ पर भी उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने एक अन्य मामले में अपनाए गए ‘टू-प्रॉन्ग टेस्ट’ पर भी आपत्ति जताई. इस टेस्ट के तहत आरोपी को जमानत पाने के लिए यह साबित करना पड़ता था कि पहली नजर में उसके खिलाफ मामला मजबूत नहीं है. कोर्ट ने कहा कि ऐसा दृष्टिकोण ट्रायल से पहले की हिरासत को सजा में बदल सकता है. लेकिन अगर केवल शुरुआती आरोपों के आधार पर किसी को सालों तक जेल में रखा जाए, तो यह न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ होगा.

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उमर खालिद पर क्या हैं आरोप?

उमर खालिद को सितंबर 2020 में दिल्ली दंगों की कथित बड़ी साजिश मामले में गिरफ्तार किया गया था. दिल्ली पुलिस का आरोप है कि उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी प्रदर्शनों के दौरान भड़काऊ भाषण दिए थे और वे दंगों की कथित साजिश का हिस्सा थे. उन पर UAPA समेत कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था. तब से वह इसी मामले में जेल में हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल 5 जनवरी को उनके मामले की सुनवाई करते हुए उन्हें एक साल तक जमानत मांगने से रोक दिया गया था.

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