पवन खेड़ा को मिली सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत, कांग्रेस ने कहा- सच की जीत हुई

सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत दे दी. यह मामला असम पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज मानहानि और जालसाजी के केस से जुड़ा है.

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को (1 मई) उन्हें अग्रिम जमानत दे दी. यह मामला असम पुलिस द्वारा दर्ज मानहानि और जालसाजी केस से जुड़ा है, जो असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान की शिकायत पर दर्ज हुआ था.

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि इस मामले में दोनों पक्षों की तरफ से आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए हैं. कोर्ट ने साफ किया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाली व्यक्तिगत आजादी को खतरे में नहीं डाला जा सकता. इसे हर हाल में सुरक्षित रखा जाना चाहिए.

सरमा को मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का कोई हक नहीं : कांग्रेस

खेड़ा को अग्रिम जमानत मिलने के बाद कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि सच की जीत हुई है और न्याय मिला है. उन्होंने सीएम सरमा पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें अपनी पत्नी से जुड़े मामले में तथ्य सामने रखने चाहिए थे, लेकिन कांग्रेस को बदनाम करने के लिए दिल्ली और हैदराबाद तक कार्रवाई करवाई गई. सरमा को मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का कोई हक नहीं है.

इससे पहले 30 अप्रैल को खेड़ा ने सरमा की कथित टिप्पणियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में उनकी तुलना ‘‘संवैधानिक काउबॉय या रैम्बो’’ (बाहुबली) से की थी. कोर्ट ने खेड़ा की उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसमें उन्होंने सरमा की पत्नी पर कई पासपोर्ट और विदेश में अघोषित संपत्तियां होने के आरोपों से जुड़े मामले में अग्रिम जमानत मांगी थी.

वकील अभिषेक सिंघवी ने कोर्ट में क्या कहा

खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने के गुवाहाटी हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए एस चंदुरकर की पीठ से वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने कहा था कि मुख्यमंत्री कांग्रेस नेता के खिलाफ कई आपत्तिजनक टिप्पणियां कर रहे हैं. सरमा की कथित अभद्र टिप्पणियों का जिक्र करते हुए, सिंघवी ने आशंका जताई कि अगर खेड़ा को इस मामले में गिरफ्तार होने दिया गया तो उनके साथ उचित व्यवहार नहीं किया जाएगा.

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सिंघवी ने कहा कि डॉ. बी.आर. आंबेडकर ने यदि यह कल्पना की होती कि कोई संवैधानिक पदाधिकारी ‘‘संवैधानिक काउबॉय’’ या ‘‘संवैधानिक रैम्बो’’ की तरह बोलेगा, तो वे बेचैन हो उठते. उन्होंने असम के मुख्यमंत्री का जिक्र करते हुए इस मामले को ‘‘अभूतपूर्व’’ करार दिया. सिंघवी ने कहा कि सरमा ने धमकी दी है कि खेड़ा को अपना शेष जीवन असम की जेल में बिताना पड़ेगा, जबकि मामले का मूल आधार मानहानि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के आरोप से जुड़ा है.

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Published by: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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