‘यादव जी की लव स्टोरी’ के खिलाफ याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट बोला- मोटी चमड़ी रखिए…

Yadav ji ki Love Story: फिल्म के नाम पर विवाद को लेकर आए दिन सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की जाती हैं. इसी तरह की एक याचिका फिल्म यादव जी की लव स्टोरी को लेकर दायर की गई, जिसमें कहा गया कि इससे यादव जाति की छवि खराब हो रही है. हालांकि कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इसमें ऐसी कोई भी आपत्तिजनक बात नहीं है.

Yadav ji ki Love Story: सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म यादव जी की लव स्टोरी के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. याचिकाकर्ता ने फिल्म के शीर्षक को यादव समुदाय की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताते हुए इसे असंवैधानिक करार देने की मांग की थी. बी वी नागरत्ना और उज्जल भुइयां की पीठ ने अपने फैसले के दौरान घुसखोर पंडत का भी जिक्र किया और कहा कि इस फिल्म के नाम में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे यादव समाज की छवि खराब हो रही हो. यह याचिका विश्व यादव परिषद की ओर से दाखिल की गई थी.

कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि किसी फिल्म का शीर्षक मात्र इस आधार पर असंवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता कि उससे किसी समुदाय की छवि खराब होने की आशंका जताई जा रही है. अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री देखने के बाद वह यह समझने में असमर्थ है कि फिल्म का शीर्षक किस तरह यादव समुदाय को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत करता है. पीठ ने स्पष्ट किया कि शीर्षक में ऐसा कोई शब्द या विशेषण नहीं है, जो समुदाय को खराब रोशनी में दिखाता हो और याचिकाकर्ता की आशंकाएं पूरी तरह निराधार हैं.

पीठ ने इस मामले को अपने पूर्व आदेश ‘घूसखोर पंडित’ प्रकरण से अलग बताया. कोर्ट ने कहा कि वहां ‘घूसखोर’ जैसे शब्द से एक समुदाय को भ्रष्ट अर्थों में जोड़ा गया था, जो कि नकारात्मक है. जबकि ‘यादव जी की लव स्टोरी’ फिल्म मामले में ऐसा कुछ भी नहीं है. फिल्म के टाइटल में ऐसा कोई शब्द नहीं है जो यादव समुदाय को खराब कर रहा हो. अदालत ने साफ किया कि संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत लगाए जाने वाले युक्तिसंगत प्रतिबंध यहां लागू नहीं होते.

मुस्लिम युवती के साथ दिखाया गया प्रेम संबंध

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में यह दलील दी गई कि फिल्म पूरी तरह काल्पनिक नहीं, बल्कि एक वास्तविक घटना से प्रेरित बताई जा रही है. इसमें यह भी कहा गया कि फिल्म की कहानी में यादव समाज की एक हिंदू युवती को एक मुस्लिम युवक के साथ प्रेम संबंध में दिखाया गया है. उन्होंने इसमें लड़की के कैरेक्टर को जैसे फिल्माया गया है, वह आपत्तिजनक है. किसी को इस तरह नहीं दिखाया जा सकता. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि वह दो समुदायों के बीच इस तरह के विवाह का विरोध नहीं करते. 

सुप्रीम कोर्ट ने बैंडिट क्वीन का किया जिक्र

इस पर पीठ ने फिल्म बैंडिट क्वीन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस मामले में भी गुर्जर समुदाय की छवि को लेकर आपत्तियां उठी थीं, लेकिन अदालत ने हस्तक्षेप से इनकार किया था. अदालत ने अंत में दोहराया कि केवल आशंका या संवेदनशीलता के आधार पर किसी फिल्म के शीर्षक या प्रदर्शन पर रोक नहीं लगाई जा सकती, जब तक कि अनुच्छेद 19(2) के तहत स्पष्ट प्रतिबंध लागू न हों.

‘मोटी चमड़ी रखिए…’

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि फिल्म अभी रिलीज नहीं हुई है और यदि बाद में कुछ आपत्तिजनक पाया गया तो उन्हें दोबारा अदालत आने की अनुमति दी जाए. इस पर अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा, ‘थोड़ी मोटी चमड़ी रखिए. यह फिक्शन है. एक हफ्ते में सब खत्म हो जाएगा. आजकल कोई भी थिएटर नहीं जा रहे. सभी फोन पर देख रहे हैं.’

फिल्म यादव जी की लव स्टोरी

इस फिल्म का निर्देशन अंकित भड़ाना ने किया है. इसके निर्माता संदीप तोमर हैं, जबकि कविता सह-निर्माता की भूमिका में हैं. फिल्म में प्रगति तिवारी, विशाल मोहन, अंकित भड़ाना, सुविंदर विक्की, मानसी रावत और दीपक कपूर प्रमुख किरदार निभा रहे हैं. यादव जी की लव स्टोरी को 27 फरवरी 2026 को देशभर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित किया जाना तय है.

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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