सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक बलात्कार के मामले में अपवाद की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र से जवाब मांगा है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस मुद्दे के सामाजिक प्रभाव होंगे और कुछ महीने पहले उन्होंने राज्यों से इस मामले पर अपने इनपुट साझा करने को कहा था. तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्यों से उनके विचार मांगे हैं. इस मसले का ना सिर्फ कानूनी प्रभाव होगा बल्कि सामाजिक प्रभाव होगा.
दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाया था खंडित फैसला
गौरतलब है कि मुख्य मामला वैवाहिक बलात्कार पर दिल्ली हाईकोर्ट के खंडित फैसले के खिलाफ अपील से संबंधित है. दिल्ली हाईकोर्ट भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 375 के अपवाद को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विचार कर रहा था, जिसमें यह प्रावधान है कि पति अपनी पत्नी के साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बना सकता है. इस मसले पर दो जज की बेंच ने खंडित फैसला दिया था.
अगली सुनवाई 21 मार्च को होगी
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि 15 फरवरी 2023 तक वह जवाबी हलफनामा दाखिल करे. इस मसले पर अगली सुनवाई 21 मार्च 2023 को होगी. कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ कोर्ट पहुंची महिला ने कोर्ट से अपनी पहचान छुपाने की मांग की थी जिसे मान लिया गया है.
पत्नी के साथ जबरदस्ती संभोग बलात्कार नहीं
याचिकाकर्ता ने आईपीसी की धारा 375 के तहत वैवाहिक दुष्कर्म को अपवाद माने जाने को चुनौती दी थी, जिसमें यह प्रावधान है कि अगर पति अपनी पत्नी के साथ दुष्कर्म करता है तो उसे दुष्कर्म नहीं माना जायेगा.
