Delhi's Rouse Avenue Court:दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के नाम को भारतीय नागरिक बनने से पहले कथित तौर पर मतदाता सूची में शामिल किए जाने के मामले में सुनवाई हुई. एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला 13 अगस्त के लिए सुरक्षित रख लिया है. साथ ही, अदालत ने दोनों पक्षों को एक अगस्त तक लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया है.
याचिकाकर्ता ने FIR की मांग दोहराई
इस मामले में याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी का आरोप है कि सोनिया गांधी का नाम भारतीय नागरिकता मिलने से पहले ही वोटर लिस्ट में दर्ज कर दिया गया था. उनका कहना है कि यदि ऐसा हुआ है तो इसकी जांच होनी चाहिए और कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एफआईआर दर्ज की जाए. इससे पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उनकी मांग खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ उन्होंने पुनरीक्षण याचिका दायर की है.
सोनिया गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर.एस. चीमा ने अदालत में दलील दी कि याचिकाकर्ता द्वारा पेश किए गए दस्तावेज विश्वसनीय नहीं हैं. यह मामला केवल बेबुनियाद आरोपों पर आधारित है. उनका कहना था कि निचली अदालत ने पहले ही सही फैसला दिया था. अब इस पुराने मामले को दोबारा उछालने का कोई आधार नहीं है.
कोर्ट की टिप्पणियों से बढ़ी चर्चा
इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पहले यह सवाल भी उठाया था कि यदि रिकॉर्ड में ऐसा दिखता है कि सोनिया गांधी 1983 में भारतीय नागरिक बनने से पहले मतदाता बनीं, तो इस पहलू का क्या जवाब है. वहीं कोर्ट ने यह भी पूछा कि लगभग आधी सदी पुराने मामले में अब जांच किस आधार पर और किन लोगों के खिलाफ होगी.
अब 13 अगस्त पर टिकी नजर
यह मामला लंबे समय से कानूनी और राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है. अब सभी की निगाहें 13 अगस्त पर हैं, जब राउज एवेन्यू कोर्ट यह तय करेगी कि मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा जाएगा या फिर एफआईआर दर्ज कराने की मांग पर आगे की कार्रवाई होगी. अदालत का फैसला इस पुराने विवाद की दिशा तय करने में अहम माना जा रहा है.
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