जम्मू में आतंकवादियों से संबंध रखने के मामले में संदिग्ध के घर पर एसआईए की छापेमारी

जम्मू कश्मीर के कुलगाम जिले में सुरक्षा बलों ने रविवार को दो आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने के साथ ही पांच ‘हाइब्रिड’ आतंकवादियों को गिरफ्तार किया. पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि उनके पास से दो पिस्तौल, तीन हथगोले, एक यूबीजीएल और कुछ गोला-बारूद जब्त किया गया है.

विशेष जांच एजेंसी (एसआईए) ने जम्मू के बाहरी इलाके में आतंकवादियों के एक पूर्व सहयोगी के घर पर मंगलवार को छापा मारा. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस की आतंकवाद रोधी शाखा ने सुंजवान के पीर बाग इलाके में स्थित मोहम्मद इकबाल के घर पर तड़के छापा मारा और जांच के लिए एक मोबाइल फोन और दो सिम कार्ड जब्त किए.

इकबाल आतंकवादियों का एक पूर्व सहयोगी है

अधिकारियों ने बताया कि मूल रूप से रियासी जिले की माहौर तहसील के खोर गांव का रहने वाला इकबाल आतंकवादियों का एक पूर्व सहयोगी है. उन्होंने बताया कि यह छापेमारी इस संदेह के कारण की गई कि उसके आतंकवादियों के साथ अब भी संबंध हैं.

जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बलों ने दो आतंकी मॉड्यूल का किया भंडाफोड़, पांच आतंकी गिरफ्तार

जम्मू कश्मीर के कुलगाम जिले में सुरक्षा बलों ने रविवार को दो आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने के साथ ही पांच ‘हाइब्रिड’ आतंकवादियों को गिरफ्तार किया. पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि उनके पास से दो पिस्तौल, तीन हथगोले, एक यूबीजीएल और कुछ गोला-बारूद जब्त किया गया है. अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की पहचान आदिल हुसैन वानी, सुहैल अहमद डार, एतमाद अहमद लावे, मेहराज अहमद लोन और सबजार अहमद खार के तौर पर की गई है. उन्होंने बताया कि कैमोह पुलिस थाने में एक प्राथमिकी दर्ज की गई है और मामले की जांच की जा रही है.

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जम्मू-कश्मीर: एनआईए अदालत ने 10 अलगाववादियों की जमानत याचिका खारिज की

जम्मू-कश्मीर की एक विशेष अदालत ने प्रतिबंधित संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) को पुनर्जीवित करने की कोशिश के आरोप में गिरफ्तार किए गए 10 अलगाववादी नेताओं की जमानत याचिकाएं सोमवार को खारिज कर दीं. श्रीनगर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं एनआईए अधिनियम के तहत नामित विशेष न्यायाधीश संदीप गंडोत्रा ने अलगाववादियों की याचिकाओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि अगर उन्हें इस स्तर पर जमानत दी गई, तो यह जनता और राज्य के हितों को खतरे में डाल देगा. अदालत ने कहा, अपराध की प्रकृति व गंभीरता और राज्य के व्यापक हितों तथा इसकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, आरोपी व्यक्ति/आवेदक इस स्तर पर जमानत के हकदार नहीं हैं.

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