इस कोरोना काल में स्कूल बंद है और बच्चों को शिक्षक ऑनलाइनइ क्लास दे रहे हैं. लेकिन कभी आपने सोचा है कि उन बच्चों के साथ क्या होता होगा जो सुदूर गांव में रहते हैं और वहां मोबाइल नेटवर्क बहुत मुश्किल से आता है. जी हां…आइए आज हम आपको ऐसे गांव में ले चलते हैं जहां के बच्चे इस समस्या से दो चार हो रहे हैं.
गांव का नाम है धडगाव जो महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में पडता है. यहां के एक शिक्षक लक्ष्मण पवार नेटवर्क सही न आने के कारण बच्चों को पहाड़ी पर या पेड़ पर ले जाकर पढ़ाने का काम कर रहे हैं. इस संबंध में उप निदेशक शिक्षा प्रभागीय अधिकारी नाशिक प्रवीण पाटिल ने कहा कि बच्चों को जहां नेटवर्क मिलता है वहां स्टडी मेटेरियल डाउनलोड कर पढ़ाई करते हैं.
देशभर के स्कूल बंद हैं : कोरोना महामारी के कारण मार्च के तीसरे सप्ताह से देशभर में स्कूल कॉलेज सहित सभी एजूकेशनल इंस्टीट्यूट बंद हैं. कई मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया जा रहा है कि 1 सितंबर 2020 से देश में दोबारा स्कूल खोलने का फैसला सरकार ले सकती है. हालांकि अभी तक इस बारें में शिक्षा मंत्रालय या फिर केंद्र सरकार की तरफ से किसी भी तरह का कोई नोटिफिकेशन नहीं आया है.
जुलाई में हुआ था सर्वे : आपको बताते चलें कि जुलाई में हुए एक सर्वे के अनुसार ज्यादातर अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने के पक्ष में नजर नहीं आ रहे थे. राज्य सरकारों का भी कहना है कि स्कूल न खुलने से ऐसे बच्चों को परेशानी का सामना करना पड रहा है, जो गरीब हैं और जिनके पास ऑनलाइन पढ़ाई के लिए सुविधा उपलब्ध नहीं है.
महाराष्ट्र टॉप पर : आपको बता दें कि कोरोना वायरस से देश में सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में महाराष्ट्र टॉप पर है. आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटे में जिन 876 लोगों की जान गई है, उनमें से सबसे अधिक 228 लोग महाराष्ट्र के थे. मंत्रालय ने बताया कि अब तक देश में कोविड-19 से हुई कुल 51,797 मौतों में सबसे अधिक महराष्ट्र में 20,265 लोगों की जान गई है. सूबे में महामारी के मामले छह लाख के पार चले गये हैं.
Posted By : Amitabh Kumar
