Bar Election: उम्मीदवार लड़ सकते हैं एक से अधिक सीट पर चुनाव, सुप्रीम कोर्ट ने की रोक लगाने वाली याचिका खारिज

चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि उम्मीदवार कई कारणों से अलग-अलग सीट से चुनाव लड़ सकते हैं. पीठ में जस्टिस पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला भी शामिल थे. कोर्ट ने कहा कि यह ‘विधायी नीति’ का विषय है.

सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उम्मीदवारों के एक साथ एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया था.

कोर्ट ने कहा, उम्मीदवार कई कारणों से लड़ सकते हैं अलग-अलग सीट से चुनाव

कोर्ट ने कहा कि यह ‘विधायी नीति’ का विषय है. चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि उम्मीदवार कई कारणों से अलग-अलग सीट से चुनाव लड़ सकते हैं. पीठ में जस्टिस पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला भी शामिल थे. पीठ अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33(7) को अवैध और संविधान के दायरे से बाहर घोषित करने का अनुरोध किया गया था.

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33(7) देता है व्यक्ति को दो निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ने की अनुमति

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33(7) एक व्यक्ति को दो निर्वाचन क्षेत्रों से किसी एक आम चुनाव या कई उपचुनावों में या द्विवार्षिक चुनाव लड़ने की अनुमति देता है. पीठ ने कहा, उम्मीदवारों को एक से अधिक सीट से चुनाव लड़ने की अनुमति देना विधायी नीति का विषय है क्योंकि इस तरह का एक विकल्प देकर देश में राजनीतिक लोकतंत्र को आगे बढ़ाना आखिरकार संसद की इच्छा पर निर्भर करता है.

याचिका में दी गयी थी ये दलील

उपाध्याय की ओर से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि यदि कोई प्रत्याशी दो सीट से चुनाव लड़ता है और दोनों पर उसकी जीत हो जाती है, तो उसे एक सीट छोड़नी होती है जिसके बाद उपचुनाव कराना जरूरी होता है और राजकोष पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है. उन्होंने कहा कि 1996 में किये गये एक संशोधन से पहले, उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने के लिए सीट की संख्या की कोई सीमा नहीं थी. इस संशोधन में इस संख्या को दो तक सीमित कर दिया गया. पीठ ने कहा कि यह निर्णय संसद को लेना है कि एक उम्मीदवार एक से अधिक सीट से चुनाव लड़ सकता है, या नहीं.

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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