उत्तर प्रदेश के वाराणसी के पास स्थित प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया गया है. पीटीआई न्यूज एजेंसी के मुताबित, दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में यह ऐतिहासिक फैसला लिया गया. इसके साथ ही सारनाथ भारत का 45वां विश्व धरोहर स्थल बन गया है. यूनेस्को ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर इसकी आधिकारिक घोषणा करते हुए इसे भारत की नई विश्व धरोहर बताया.
भगवान बुद्ध के पहले उपदेश की धरती को मिली वैश्विक पहचान
सारनाथ बौद्ध धर्म का सबसे पवित्र तीर्थस्थल माना जाता है. यहीं भगवान गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश देकर ‘धर्मचक्र प्रवर्तन’ किया था. यही कारण है कि दुनिया भर से लाखों बौद्ध श्रद्धालु हर साल यहां दर्शन के लिए आते हैं. यूनेस्को की सूची में शामिल होने से इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थल की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी.
भगवान गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश देकर ‘धर्मचक्र प्रवर्तन’ किया था. यही कारण है कि दुनिया भर से लाखों बौद्ध श्रद्धालु हर साल यहां दर्शन के लिए आते हैं.
पीएम मोदी बोले- हर भारतीय के लिए गर्व और सम्मान का क्षण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि सारनाथ का भगवान बुद्ध से गहरा संबंध है, जिनका ज्ञान, करुणा और सद्भाव का संदेश पूरी मानवता को प्रेरित करता है. उन्होंने कहा कि यह सम्मान भारत की समृद्ध सभ्यतागत और आध्यात्मिक विरासत का उत्सव है और इससे दुनिया भर के अधिक लोग सारनाथ आकर बुद्ध के आदर्शों से जुड़ेंगे.
लंबे प्रयासों के बाद मिली सफलता
केंद्र सरकार ने 2025-26 के नामांकन चक्र के तहत सारनाथ का प्रस्ताव यूनेस्को को भेजा था. केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी इसकी जानकारी संसद में दी थी. अब यूनेस्को की मुहर लगने के बाद सारनाथ न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया की साझा सांस्कृतिक धरोहर बन गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पर्यटन, स्थानीय रोजगार और बौद्ध विरासत के संरक्षण को नई गति मिलेगी.
