Sachin Pilot : सचिन पायलट और सारा अब्दुल्ला की ऐसी थी लव लाइफ जानें कब हुआ तलाक

सचिन पायलट ने दाखिल एफिडेविट में अपनी वैवाहिक स्थिति की जगह पर तलाकशुदा लिखा है. हालांकि सचिन पायलट ने अपने दोनों बेटों का नाम अपने आश्रितों में रखा है.

कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कल टोंक विधानसभा सीट से अपना नामांकन दाखिल किया. उनके नामांकन से जिस सबसे बड़ी बात का खुलासा हुआ है वो यह है कि सचिन पायलट का पत्नी सारा अब्दुल्ला से तलाक हो गया और ये दोनों अब पति-पत्नी नहीं रहे. सारा और सचिन की शादी 15 जनवरी 2004 में हुई थी. इनके दो बच्चे हैं आरन और विहान.

सचिन पायलट ने दाखिल एफिडेविट में अपनी वैवाहिक स्थिति की जगह पर तलाकशुदा लिखा है. हालांकि सचिन पायलट ने अपने दोनों बेटों का नाम अपने आश्रितों में रखा है.

सचिन पायलट और सारा अब्दुल्ला की मुलाकात विदेश में हुई थी. विदेश में ही दोनों के बीच प्यार पनपा और दोनों ने परिवार के विरोध के बावजूद शादी कर ली.

सचिन और सारा अलग-अलग धर्म के हैं और इसी वजह से दोनों के परिवार वाले शादी के लिए राजी नहीं हो रहे थे. फारुक अब्दुल्ला इनकी शादी में शामिल भी नहीं हुए .

2018 में जब सचिन पायलट उपमुख्यमंत्री बने थे तो सारा अपने बच्चों के साथ कार्यक्रम में शामिल हुई थी, उसके बाद इन्हें साथ में नहीं देखा गया. बीच-बीच में इनके तलाक की खबरें सामने आती थीं, लेकिन कभी दोनों में से किसी ने भी इसपर कुछ कहा नहीं. तलाक कब हुआ है इसकी जानकारी भी अभी सामने नहीं आई है.

सचिन पायलट द्वारा दाखिल एफिडेविट में इस बात का जिक्र भी है कि सचिन पायलट की संपत्ति पांच साल में दोगुनी हो गई है. उनके पास 2018 में 3.8 करोड़ की संपत्ति थी जो साल 2023 में 7.5 करोड़ हो गई है.

सचिन पायलट ने चुनाव आयोग को जो जानकारी दी है उसके अनुसार उनके पास कोई गाड़ी भी नहीं है और उनके पास कैश भी बहुत है.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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