रोजगार मेला : पीएम मोदी ने कहा-हर युवा देश सेवा का मौका चाहता है, ‘मोदी गारंटी’ की बात भी दोहराई

भारत का चंद्रयान 3 चंद्रमा की धरती पर पहुंच चुका है. पूरा देश गौरवमय हो चुका है. ऐसे समय में आप अपने जीवन की इतनी सफल यात्रा शुरू करने का अवसर मिल रहा. मैं सभी चयनित अभ्यर्थियों और उसके परिजनों को बधाई देना चाहता हूं. आपको सेना के साथ काम करने का अवसर मिल रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रोजगार मेला में केंद्रीय सशस्त्र बलों द्वारा भर्ती किए गए 51,000 से अधिक लोगों को नियुक्ति पत्र वितरित किए. इस अवसर पर उन्होंने इन लोगों को ‘अमृत रक्षक’ बताया है. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस बार रोजगार मेले का आयोजन विशेष अवसर पर हुआ है. भारत का चंद्रयान 3 चंद्रमा की धरती पर पहुंच चुका है. पूरा देश गौरवमय हो चुका है. ऐसे समय में आप अपने जीवन की इतनी सफल यात्रा शुरू करने का अवसर मिल रहा. मैं सभी चयनित अभ्यर्थियों और उसके परिजनों को बधाई देना चाहता हूं. आपको सेना के साथ काम करने का अवसर मिल रहा है.

अर्धसैनिक बलों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव

हर युवा यह चाहता है कि उसे देश की सेवा करने का मौका मिले. ऐसे समय में आपको सेना और पुलिस के साथ काम करने का मौका मिल रहा है. हमारी सरकार ने अर्धसैनिक बलों की प्रक्रिया में बदलाव किया है. अब परीक्षा मातृभाषा में हो रही है. नियुक्ति की संख्या को बढ़ाया गया है. इसका उद्देश्य हमारे युवाओं के लिए नए रास्ते खोलना है.


फार्मा क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा

भारत इस दशक में दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन जाएगा; मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ यह गारंटी देता हूं. ऑटोमोबाइल, फार्मा क्षेत्र बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और ये आगामी दिनों में रोजगार के बड़े अवसर पैदा करेंगे. पर्यटन क्षेत्र 2030 तक भारतीय अर्थव्यवस्था में संभवत: 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक का योगदान देगा, इससे 13-14 करोड़ नयी नौकरियां पैदा होने की उम्मीद . इसकी वजह यह है कि देश में कानून का राज कायम हो गया है. कानून का राज कायम होने से विकास को गति मिलती है.

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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