ऋषि सुनक बनेंगे ब्रिटेन के पीएम, भारत में 'दंगल' शुरू, भाजपा ने किया कांग्रेस और महबूबा पर पलटवार

भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि भारतीय मूल के एक सक्षम नेता ऋषि सुनक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बनने वाले हैं. इस असाधारण सफलता के लिए हम सभी को उनकी सराहना करनी चाहिए. यह दुखद है कि कुछ भारतीय राजनेता दुर्भाग्य से इस अवसर का राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास कर रहे हैं.

ऋषि सुनक का नाम सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है जिसपर लोग लगातार अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं. भारतीय नेताओं की प्रतिक्रिया भी इसपर आ रही है. इसी क्रम में जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने एक ट्वीट किया है जिसपर संग्राम छिड़ता नजर आ रहा है. उन्होंने अपने ट्विटर वॉल पर लिखा कि जहां ब्रिटेन ने अल्पसंख्यक मूल के एक शख्स को अपने प्रधानमंत्री के तौर पर स्वीकार किया है. वहीं भारत अभी भी CAA और NRC जैसे विभाजनकारी कानूनों के साथ आगे बढ़ रहा है. महबूबा मुफ्ती के बयान के बाद भाजपा की भी प्रतिक्रिया सामने आयी है. यहां चर्चा कर दें कि कांग्रेस के भी कुछ नेताओं ने इसी तरह का विचार प्रकट किया है.

भाजपा ने किया पलटवार

भाजपा ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री चुने गये भारतीय मूल के ऋषि सुनक को एक सक्षम नेता बताया और मंगलवार को कहा कि इस असाधारण सफलता के लिए उनकी सराहना की जानी चाहिए लेकिन देश के कुछ विपक्षी नेता दुर्भाग्य से इस अवसर पर भी राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने एक के बाद एक ट्वीट कर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पी चिदंबरम और शशि थरूर पर पलटवार किया. चिदंबरम और थरूर सहित कुछ अन्य विपक्षी नेताओं ने सुनक के प्रधानमंत्री बनने का मार्ग प्रशस्त होने के बाद सोमवार को उम्मीद जताई थी कि भारत इस घटनाक्रम से सीख लेगा और अल्पसंख्यकों में से किसी को एक दिन शीर्ष पद पर चुने जाने की परंपरा को अपनाएगा.


ए पी जे अब्दुल कलाम का जिक्र

भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि भारतीय मूल के एक सक्षम नेता ऋषि सुनक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बनने वाले हैं. इस असाधारण सफलता के लिए हम सभी को उनकी सराहना करनी चाहिए. यह दुखद है कि कुछ भारतीय राजनेता दुर्भाग्य से इस अवसर का राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास कर रहे हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रसाद ने कहा कि सुनक के प्रधानमंत्री पद पर निर्वाचन के बाद कुछ नेता बहुसंख्यकवाद के खिलाफ अति सक्रिय हो गये हैं. उन्होंने कहा कि वह ऐसे नेताओं को ए पी जे अब्दुल कलाम के राष्ट्रपति के रूप में असाधारण कार्यकाल और प्रधानमंत्री के रूप में मनमोहन सिंह के 10 वर्षों के कार्यकाल की याद दिलाना चाहेंगे. आज एक प्रतिष्ठित आदिवासी नेता देश की राष्ट्रपति हैं.

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क्या कहा कांग्रेस नेताओं ने

कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने सोमवार को एक ट्वीट में कहा था कि पहले कमला हैरिस और अब ऋषि सुनक. अमेरिका और ब्रिटेन के लोगों ने अपने देशों के गैर-बहुसंख्यक नागरिकों को गले लगाया है और उन्हें सरकार में उच्च पद के लिए चुना है. मुझे लगता है कि भारत और बहुसंख्यकवाद का पालन करने वाले दलों को एक सबक सीखना चाहिए. वहीं कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा था कि अगर ऐसा होता है, तो मुझे लगता है कि हम सभी को यह स्वीकार करना होगा कि एक अल्पसंख्यक को सबसे शक्तिशाली पद पर आसीन कर ब्रिटेनवासियों ने दुनिया में बहुत दुर्लभ काम किया है. हम भारतीय मूल के सुनक की इस उपलब्धि का जश्न मना रहे हैं तो आइए ईमानदारी से पूछें कि क्या यहां यह हो सकता है?

भाषा इनपुट के साथ

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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