Fact Check : रक्षाबंधन पर महिलाओं को मिलेगा एक साल का फ्री मोबाइल रिचार्ज? PM मोदी के वीडियो का क्या है सच

रक्षाबंधन पर महिलाओं को एक साल का फ्री मोबाइल रिचार्ज देने का दावा वायरल है. लेकिन सरकार ने असल में क्या तोहफा दिया है? जानिए डाक विभाग की राखी स्पेशल पहल और वायरल वीडियो का सच.

सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इसमें दावा किया जा रहा है कि रक्षाबंधन के मौके पर केंद्र सरकार देश की सभी महिलाओं को एक साल का फ्री मोबाइल रिचार्ज देने जा रही है. यह वीडियो इंस्टाग्राम हैंडल ‘aapka_bhai77’ समेत कई सोशल मीडिया अकाउंट्स से शेयर किया जा रहा है.

लेकिन क्या सरकार ने सच में ऐसी कोई योजना शुरू की है? आइए, पूरी बात आसान भाषा में समझते हैं.

वायरल वीडियो में क्या दावा किया जा रहा जा रहा है?

वायरल वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नजर आ रहे हैं. प्रधानमंत्री वीडियो में घोषणा कह रहे हैं कि रक्षाबंधन पर महिलाओं को सरकार की ओर से खास तोहफा दिया जाएगा और उन्हें एक साल तक मोबाइल रिचार्ज के लिए पैसे नहीं देने होंगे.

वीडियो को इस तरह बनाया गया है कि देखने पर यह प्रधानमंत्री की असली घोषणा जैसा लगता है. इसी वजह से कई लोग इसे सच मानकर आगे शेयर कर रहे हैं.

क्या है फ्री मोबाइल रिचार्ज का सच

  • इस दावे की जांच पीआईबी फैक्ट चेक ने की है. जांच में सामने आया कि वायरल वीडियो असली नहीं है.
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने वीडियो को डिजिटल तरीके से बदलकर उसमें भ्रामक दावा जोड़ा गया है.
  • पीआईबी फैक्ट चेक ने साफ कहा है कि केंद्र सरकार ने महिलाओं को एक साल का मुफ्त मोबाइल रिचार्ज देने की कोई घोषणा नहीं की है.

यानी सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा यह दावा पूरी तरह फर्जी है. देखिए पीआईबी का ये पोस्ट

पहले भी वायरल हो चुके हैं मुफ्त रिचार्ज के फर्जी दावे

हालांकि यह पहली बार नहीं है जब सरकारी योजना के नाम पर मुफ्त मोबाइल रिचार्ज का दावा वायरल हुआ हो.

  • इससे पहले भी सोशल मीडिया पर ऐसे मैसेज और वीडियो सामने आ चुके हैं, जिनमें लोगों को मुफ्त रिचार्ज देने का लालच दिया गया.
  • कुछ मामलों में सरकारी संस्थाओं के नाम और लोगो का इस्तेमाल करके लोगों को भरोसा दिलाने की कोशिश की गई.
  • ऐसे दावों का मकसद लोगों को किसी लिंक पर क्लिक करवाना या उनकी निजी जानकारी हासिल करना भी हो सकता है.
  • इसलिए अगर किसी पोस्ट में मुफ्त रिचार्ज का दावा किया गया है, तो उस पर तुरंत भरोसा करने के बजाय पहले उसकी आधिकारिक जानकारी जरूर जांच लें.

ऐसे वायरल वीडियो से रहें सावधान

  • त्योहारों के समय मुफ्त रिचार्ज, नकद इनाम या सरकारी लाभ से जुड़े फर्जी दावे तेजी से फैलते हैं. खासकर जब वीडियो में किसी बड़े नेता या सरकारी संस्था का नाम इस्तेमाल किया गया हो, तो लोग आसानी से उसे सच मान लेते हैं.
  • ऐसे किसी भी संदिग्ध वीडियो या मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक करने से बचें. अपना मोबाइल नंबर, ओटीपी, बैंक खाते की जानकारी या यूपीआई से जुड़ी जानकारी भी किसी अनजान व्यक्ति या वेबसाइट के साथ शेयर न करें.
  • अगर किसी सरकारी योजना को लेकर संदेह है, तो उसकी जानकारी संबंधित सरकारी वेबसाइट या आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर जरूर देखें.

रक्षाबंधन को लेकर सरकार ने असल में क्या घोषणा की है?

अब सवाल है कि रक्षाबंधन 2026 को लेकर सरकार की ओर से वास्तव में क्या पहल की गई है?

  • उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में महिलाओं के लिए एक साल के मुफ्त मोबाइल रिचार्ज जैसी किसी योजना का जिक्र नहीं है. हां, डाक विभाग ने रक्षाबंधन के मौके पर कुछ खास पहल जरूर की हैं.
  • उदाहरण के लिए, छत्तीसगढ़ डाक परिमंडल ने राखी स्पेशल गिफ्ट बॉक्स शुरू किया है. इसकी कीमत 520 रुपये है. इसमें दो राखियां, अक्षत-कुमकुम, बैज, फ्रिज मैग्नेट, पोस्टकार्ड और की-रिंग जैसी चीजें शामिल हैं.
  • इसके अलावा, उत्तर गुजरात क्षेत्र में डाक विभाग ने विशेष राखी कवर और गिफ्ट बॉक्स उपलब्ध कराने की जानकारी दी है. इनका इस्तेमाल राखी और उपहार देश-विदेश में भेजने के लिए किया जा सकता है. इन गिफ्ट बॉक्स की कीमत 35 से 50 रुपये तक बताई गई है.

कुल मिलाकर, रक्षाबंधन पर महिलाओं को एक साल का मुफ्त मोबाइल रिचार्ज देने का दावा सच नहीं है. पीआईबी फैक्ट चेक ने वायरल वीडियो को फर्जी बताया है और स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार ने ऐसी कोई घोषणा नहीं की है.

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By गौतम कुमार

गौतम कुमार वर्तमान में प्रभात खबर से जुड़े पत्रकार हैं. वे राजनीति, इतिहास, साहित्य, खेल, कानून, लोक संस्कृति और मनोरंजन जैसे विविध विषयों पर लिखते हैं. किसी विषय पर रिपोर्टिंग या लेखन के दौरान उनका जोर केवल घटनाओं की जानकारी देने पर नहीं, बल्कि उसके पीछे की पृष्ठभूमि, सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ और उसके प्रभाव को समझाने पर रहता है.

अपने पत्रकारिता करियर में गौतम कुमार ने RealisticMedia और दैनिक भास्कर जैसे मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. पत्रकारिता के अलावा उन्हें डिजिटल कंटेंट लेखन, वीडियो स्क्रिप्टिंग और डिजिटल प्रोडक्शन का अनुभव भी है. स्वतंत्र लेखक और ब्लॉगर के तौर पर उन्होंने अलग-अलग विषयों और डिजिटल माध्यमों के लिए लेखन किया है.

किताबों, फिल्मों और कहानियों में उनकी विशेष रुचि है. वे मानते हैं कि अच्छी किताब या अच्छी फिल्म मिलने के बाद बाकी दुनिया कुछ देर इंतजार कर सकती है. यही रुचि उनके लेखन में भी दिखाई देती है, जहां वे खबर और घटनाओं के पीछे छिपी कहानी को समझने और पाठकों के सामने उसे सरल और संदर्भपूर्ण तरीके से रखने की कोशिश करते हैं.

गौतम कुमार मानते हैं कि किसी विषय पर राय अलग हो सकती है और नजरिया भी अलग हो सकता है, लेकिन सार्थक संवाद की शुरुआत इन्हीं अलग-अलग दृष्टिकोणों को समझने से होती है. इसलिए पाठकों की राय, सुझाव और विचार उनके लिए महत्वपूर्ण हैं. उनसे सोशल मीडिया के माध्यम से भी जुड़ा जा सकता है.

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