Railway : घने कोहरे में कवच के सहारे तेज गति से ट्रेन चलाते दिखा लोको पायलट

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें घने कोहरे में ट्रेन तेज गति से चल रही है. इसमें ट्रेन ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम(कवच) से सिग्नल के जरिये आगे बढ़ती दिख रही है.

Railway : सर्दियों के मौसम में उत्तर भारत में कोहरे के कारण ट्रेनों की रफ्तार पर ब्रेक लग जाता है. घने कोहरे के कारण ट्रेनें काफी लेट चलती है और ट्रेन हादसे का भी खतरा रहता है. शनिवार को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें घने कोहरे में ट्रेन तेज गति से चल रही है. इसमें ट्रेन ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम(कवच) से सिग्नल के जरिये आगे बढ़ती दिख रही है. रेलवे ने जीरो हादसे के लिए कवच सिस्टम का विकास किया है.

यह एक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) सिस्टम है. इसे अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (आरडीएसओ) ने डिजाइन किया है. वीडियो में दिख रहा है कि ट्रेन का लोको पायलट घने कोहरे में 130 किलोमीटर की रफ्तार से मैन्युअल सिग्नल सिस्टम की बजाय कवच के सिग्नल की निगरानी कर ट्रेन चला रहा है. वीडियो में केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि बाहर घना कोहरा है. कवच केबिन के अंदर सिग्नल दिखा रहा है और ड्राइवर को सिग्नल के लिए बाहर देखने की जरूरत नहीं है. 

कैसे काम करता है कवच

खराब मौसम में कवच ट्रेन की गति की निगरानी और सिग्नल मुहैया कराता है. इससे हादसा होने की संभावना बेहद कम हो जाती है. अगर लोको पायलट समय में उचित कदम नहीं उठा पाता है तो कवच उसे दुरुस्त करने का काम करता है. कवच के कारण घने कोहरे में केबिन के अंदर सिग्नल संबंधी जानकारी डिस्पले पर दिखती है और लोको पायलट को बाहर देखने की जरूरत नहीं होती है. रेलवे देश के अधिकांश रूट पर इस सिस्टम को लगाने की योजना पर काम कर रहा है.

पिछले पांच साल में औसतन हर साल 43 ट्रेन हादसे हुए है. जबकि वर्ष 2015 से वर्ष 2022 के दौरान औसतन हर साल ट्रेन हादसे में 56 लोगों को जान गंवानी पड़ी है. कवच सिस्टम ट्रैक पर जानवर, ट्रैक खराब या टूटे होने संबंधी खतरे का पता लगाकर ब्रेक लगाने का काम करता है. यह सिस्टम खराब मौसम में ट्रैक पर होने वाले किसी खतरे, सिग्नल और स्पीड के बारे में लोको पायलट को सूचित करता है. पूरा सिस्टम ऑप्टिकल फाइबर केबल और टेलीकॉम टावर से जुड़ा होता है.

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Published by: Anjani kumar singh

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