राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर साधा निशाना, कहा- अमेरिका के आज्ञाकारी नौकर की तरह कर रहे हैं काम, भारतीयों की हो रही दुर्गति

Rahul Gandhi : होर्मुज स्ट्रेट के पास एक जहाज पर सवार तीन भारतीयों की मौत के बाद से राहुल गांधी ने पीएम मोदी को निशाने पर रखा है और उनकी जमकर आलोचना कर रहे हैं. अब राहुल गांधी ने उन्हें अमेरिका का नौकर तक करार दिया है.

Rahul Gandhi : लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने रविवार 14 जून को एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जमकर लताड़ा है. उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है कि हमारे कंप्रोमाइज्ड पीएम अमेरिका का आदेश एक आज्ञाकारी नौकर की तरह सुनते हैं उनके आदेश को मान लेते हैं.

तीन नाविकों की हत्या के बाद भी अमेरिका ने नहीं मांगी माफी

राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में लिखा है कि अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की हत्या के चंद दिन बाद भी न अफसोस, न माफी. इसके विपरीत अमेरिका ने हमें आदेश देना जारी रखा है. अमेरिका की भाषा देखिए-अमेरिकी सेना के आदेश तुरंत मानें. कोई उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. एक आजाद देश इस तरह की भाषा कभी नहीं सहेगा. लेकिन हमारे कंप्रोमाइज्ड पीएम चुप हैं. वे एक आज्ञाकारी नौकर की तरह सुनते हैं, और आदेश मान लेते हैं. वे देश का अपमान करने वालों के वश में हैं.

कंप्रोमाइज्ड पीएम के राज में दुर्गति तय

ओमान के डुक्म बंदरगाह पर खड़े एक पोत पर सवार एक भारतीय नागरिक की बीमारी की वजह से मौत हो गई है. मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ने यह जानकारी दी है. उसकी पहचान निशांत उर्थनाथन के रूप में की गई है. निशांत का शव अभी देश नहीं लाया जा सका है. जब निशांत की मौत हुई उस समय वह मोटर टैंकर (एमटी) सेलेस्टियल पर सवार थे. दूतावास ने बताया है कि इसके लिए आवश्यक प्रबंध किए जा रहे हैं, लेकिन राहुल गांधी ने एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा है कि कंप्रोमाइज्ड पीएम के राज में एक भारतीय होने का मतलब दुर्गति है. विदेशी ताकत हमारे नागरिकों को मारती है. हमारी सरकार एक आज्ञाकारी नौकर की तरह चुप-चाप आदेश मान लेती है – और हमारे नागरिक सड़ने के लिए छोड़ दिए जाते हैं. इस भारतीय को घर लाइए. अभी.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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