राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा-पत्नी के इनपुट पर मैं और पीएम मोदी दोनों कुछ नहीं कह पाएंगे, छूटे हंसी के फव्वारे

Rahul Gandhi : महिला आरक्षण बिल पर चर्चा का हिस्सा बनते हुए राहुल गांधी ने एक ओर जहां महिला सशक्तिकरण और उनके प्रतिनिधित्व से लोकतंत्र को मजबूत करने की जरूरत पर बल दिया, वहीं उन्होंने पत्नी को लेकर खुद पर और प्रधानमंत्री पर ऐसी टिप्पणी कर दी कि पूरा सदन हंसी के ठहाकों से गूंज उठा.

Rahul Gandhi : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने महिला आरक्षण अधिनियम संशोधन विधेयक पर गंभीर चर्चा को अपनी टिप्पणी से कुछ ऐसा बना दिया कि दोनों पक्ष के लोग हंस पड़े. दरअसल राहुल गांधी ने चर्चा के दौरान अपनी टिप्पणी में कहा कि पत्नी के मुद्दे पर मैं और प्रधानमंत्री दोनों ही कुछ इनपुट नहीं दे पाएंगे. उनके इस बयान पर कुछ देर के लिए पूरे सदन में हंसी गूंज उठी.

संसद में दिखा राहुल का मजाकिया अंदाज

राहुल गांधी ने महिला आरक्षण बिल पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि मैंने अपने जीवन में राष्ट्रीय महत्व की चीजों में महिलाओं को ड्राइविंग सीट पर देखा है. हमने अपने जीवन में महिलाओं से काफी कुछ सीखा है. महिलाओं ने मां, बहन और पत्नी के रूप में हमें बहुत कुछ सिखाया है. यह अलग बात है कि ना तो मेरे पास और ना ही हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास पत्नी का इनपुट है. राहुल गांधी के इतना कहते ही पूरा सदन हंस पड़ा. राहुल गांधी ने मुस्कुराते हुए कहा कि इस वजह से वे दोनों उस अनुभव से वंचित रहते हैं, जो आम तौर पर पारिवारिक जीवन में मिलता है.

राहुल गांधी ने महिलाओं को उनका हक देने की बात कही

राहुल गांधी ने चर्चा के दौरान कहा कि मैंने अपनी मां और बहन से काफी कुछ सीखा है. मैं इस बात को जानता और मानता हूं कि महिलाओं को उनका हक मिलना चाहिए. सरकार इस कानून को लागू करने में इतनी देर क्यों कर रही है, मैं यह समझ नहीं पा रहा हूं. राहुल गांधी ने अपने बयान में अपनी बहन प्रियंका गांधी की भी चर्चा की और कहा कि मैंने कल अपनी बहन को यहां महिला आरक्षण पर बोलते हुए सुना. मैं उससे बहुत कुछ सीखता हूं और उसका बड़ा भाई होने पर गर्व महसूस करता हूं.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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