Raghav Chadha vs AAP: आम आदमी पार्टी (AAP ) के भीतर बढ़ते विवाद के बीच, सांसद राघव चड्ढा ने संसद में पंजाब से जुड़े मुद्दे न उठाने के दावों पर अपनी ही पार्टी को करारा जवाब दिया है. उन्होंने एक्स पर अपना एक पुराना वीडियो शेयर किया और आरोपों का जवाब दिया. उन्होंने कहा- पंजाब न केवल उनका घर है, बल्कि कर्तव्य, भूमि और आत्मा भी है.
चड्ढा ने एक्स पर क्या लिखा?
राघव चड्ढा ने वीडियो शेयर कर एक्स पर लिखा – AAP में मेरे उन साथियों के लिए, जिन्हें मजबूरन यह कहते हुए वीडियो जारी करने पड़े, जिनमें कहा गया कि राघव चड्ढा संसद में पंजाब के मुद्दे उठाने में नाकाम रहे, पेश है एक छोटा सा ट्रेलर… पिक्चर अभी बाकी है. चड्ढा ने पोस्ट में आगे लिखा- पंजाब मेरे लिए सिर्फ चर्चा का विषय नहीं है. यह मेरा घर है, मेरा फर्ज है, मेरी मिट्टी है, मेरी आत्मा है.
चड्ढा ने पंजाब से जुड़े मुद्दे गिनाए, जिसे संसद में उठाया
राघव चड्ढा ने 2 मिनट और 59 सेकेंड का अपना वीडियो जारी किया. जो संसद का है. वीडियो में चड्ढा पंजाब से जुड़े मुद्दे उठाते दिख रहे हैं. जिनमें नानकाना साहिब कॉरिडोर की वकालत, किसानों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानूनी गारंटी, पंजाब में लुप्त होते भूजल की समस्या का समाधान करना, भगत सिंह को भारत रत्न से सम्मानित करने की सिफारिश और कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं.
आम आदमी पार्टी और चड्ढा के बीच विवाद की वजह क्या है?
यह पूरा विवाद राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के उपनेता पद से राघव चड्ढा को हटाए जाने के बाद शुरू हुआ. जिसके बाद AAP सांसद ने पार्टी नेतृत्व पर अपनी आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए उनकी आलोचना की. चड्ढा की टिप्पणियों के बाद, आम आदमी पार्टी के कई नेताओं ने उनके खिलाफ जमकर विरोध जताया और कहा कि वह समझौते में बंधे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से डरते हैं.
आप के आरोपों को चड्ढा ने बताया सुनियोजित हमला
पार्टी की ओर से लगाए जा रहे आरोपों का जवाब देते हुए चड्ढा ने इसे सुनियोजित हमला बताया था. इस दावे का खंडन किया कि उन्होंने संसद से वॉकआउट करने या मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था.X पर एक पोस्ट में, चड्ढा ने कहा- मेरे खिलाफ एक सुनियोजित अभियान चल रहा है. वही भाषा, वही शब्द, वही आरोप. यह कोई संयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित हमला है. पहले तो मैंने सोचा कि मुझे जवाब नहीं देना चाहिए. फिर मैंने सोचा कि अगर झूठ को सौ बार दोहराया जाए, तो शायद कुछ लोग उस पर विश्वास कर लें. इसलिए मैंने जवाब देने का फैसला किया.
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