वंदे मातरम् विधेयक 29 जुलाई को राज्यसभा और 30 जुलाई को लोकसभा से पारित हुआ था. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस बार स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर पहली बार लालकिले की प्राचीर से वंदे मातरम् का गायन किया जाएगा.
कानून में क्या हैं मुख्य प्रावधान?
- सजा और जुर्माना: नए कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर वंदे मातरम् के गायन को रोकता है या इसे गा रही किसी सभा में व्यवधान डालता है, तो उसे अधिकतम तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है.
- दोबारा अपराध पर कठोर कार्रवाई: यदि कोई व्यक्ति दोबारा या बार-बार यह अपराध करता है, तो उसे कम से कम एक साल की अनिवार्य जेल की सजा भुगतनी होगी.
- समान दर्जा: अब तक राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम के तहत केवल राष्ट्रगान 'जन गण मन' के अपमान पर ही सजा का प्रावधान था. पुराने कानून में राष्ट्रगीत के लिए ऐसा कोई विशिष्ट सुरक्षात्मक दायरा नहीं था, जिसे अब धारा तीन में संशोधन करके जोड़ दिया गया है.
1950 में डॉ राजेंद्र प्रसाद ने कहा था- वंदे मातरम् को राष्ट्रगान के बराबर सम्मान और दर्जा दिया जाएगा
विधेयक के उद्देश्यों में संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद के 24 जनवरी, 1950 को दिए गए ऐतिहासिक वक्तव्य का उल्लेख किया गया है. उन्होंने कहा था कि बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित 'वंदे मातरम्', जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, को राष्ट्रगान के बराबर ही सम्मान और दर्जा दिया जाएगा.
गृह मंत्रालय ने राष्ट्रगीत के लिए तय किए नए प्रोटोकॉल
इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 28 जनवरी को राष्ट्रगीत के लिए दिशा-निर्देश और प्रोटोकॉल जारी किए थे.
- पहले गाया जाएगा राष्ट्रगीत: जिन आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों बजाए या गाए जाएंगे, वहां सबसे पहले वंदे मातरम् का गायन होगा.
- 3 मिनट 10 सेकंड की अवधि: राष्ट्रपति के आगमन, ध्वजारोहण और राज्यपालों के संबोधन जैसे आधिकारिक अवसरों पर वंदे मातरम् के सभी छह अंतरे गाए जाएंगे, जिनकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड होगी.
- सावधान की मुद्रा अनिवार्य: राष्ट्रगीत के गायन के दौरान सभा में मौजूद सभी व्यक्तियों को 'सावधान' की मुद्रा में खड़ा होना अनिवार्य होगा.
- स्कूलों में अनिवार्य सामूहिक गायन: देश के सभी विद्यालयों में दिन की शुरुआत वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ की जाएगी.
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