राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशवासियों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि शिक्षक, डॉक्टर, किसान और अन्य लोग अपने-अपने प्रयासों से राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहे हैं. राष्ट्रपति ने कलाकारों, खिलाड़ियों, शिल्पकारों, बुद्धिजीवियों, निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों और न्यायपालिका से जुड़े लोगों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने सफाई कर्मचारियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि भारत में रहने वाले नागरिकों के साथ विदेशों में रह रहे भारतीय भी देश की प्रगति में भागीदार हैं.
उन्होंने ‘प्यारे देशवासियों’ के साथ अपना संबोधन शुरू किया. कहा कि स्वाधीनता के शताब्दी वर्ष 2047 तक के विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं.
‘वयं राष्ट्रे जागृयाम’ का संदेश, आजादी के संघर्ष को किया याद
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि ‘वयं राष्ट्रे जागृयाम’ का वेदवाक्य हमें हमेशा राष्ट्र के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा देता है. उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में शामिल सभी लोगों का लक्ष्य एक था - भारत की आजादी. स्वदेशी आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम्’ जन-जन का गीत बन गया था. उन्होंने महात्मा गांधी से जुड़े स्वतंत्रता सेनानियों और समाज सुधार में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के योगदान को भी याद किया.
विभाजन की त्रासदी को याद कर भावुक हुईं राष्ट्रपति
राष्ट्रपति ने 14 अगस्त को मनाए जाने वाले विभाजन विभीषिका दिवस का जिक्र करते हुए कहा कि इस दिन उन लोगों को याद किया जाता है, जो विभाजन की त्रासदी में मारे गए या अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए. सांप्रदायिक हिंसा के कारण लाखों लोग शरणार्थी बने, लेकिन इतनी यातना के बावजूद उन्होंने अपनी भारतीयता की पहचान नहीं छोड़ी.
550 से ज्यादा रियासतों को जोड़ना बड़ी चुनौती थी
उन्होंने कहा कि आजादी के समय देश 550 से ज्यादा रियासतों में बंटा हुआ था और उन्हें एक साथ लाना बड़ी चुनौती थी. रियासतों के विलय में सरदार वल्लभभाई पटेल की अहम भूमिका रही. राष्ट्रपति ने उन्हें नमन करते हुए कहा कि आज देश संविधान के आधार पर आगे बढ़ रहा है और नागरिकों में जनभागीदारी की भावना भारत की ताकत रही है.
समान अवसर और गरिमा को बताया संविधान का मूल आदर्श
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि प्रतिष्ठा, अवसर की समानता और व्यक्ति की गरिमा संविधान के प्रमुख आदर्श हैं. आज यह विश्वास मजबूत हो रहा है कि हर व्यक्ति बड़े सपने देख सकता है और उन्हें पूरा भी कर सकता है. उन्होंने कहा कि अभाव के कारण कोई भी व्यक्ति अवसरों से वंचित न रहे और खासकर वंचित वर्गों को समय पर सम्मान के साथ न्याय मिलना चाहिए.
ज्योतिबा फुले के योगदान को किया याद
राष्ट्रपति ने कहा कि देश महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती मना रहा है. उन्होंने महात्मा फुले और क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले के सामाजिक न्याय, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और समानता के लिए किए गए योगदान को याद किया. उन्होंने कहा कि उनके आदर्शों के अनुरूप पिछले कुछ वर्षों में वंचित वर्गों को आगे बढ़ाने को राष्ट्रीय प्राथमिकता दी गई है.
परीक्षा सुधार और युवाओं की ताकत पर जोर
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं में सुधार, गलत तरीकों पर रोक लगाने और युवाओं के लिए व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए बड़े कदम उठा रही है. उन्होंने हाल ही में 28 साल की औसत उम्र वाली युवा टीम के नेतृत्व में सफल स्पेस रॉकेट लॉन्च का भी जिक्र किया और इसे युवाओं की क्षमता का उदाहरण बताया.
कारगिल विजय दिवस और ऑपरेशन सिंदूर का किया जिक्र
राष्ट्रपति ने कहा कि सत्य और न्याय के पक्ष में मानवता विरोधी ताकतों पर जीत हासिल करना भारत की परंपरा रही है. उन्होंने 26 जुलाई को मनाए गए कारगिल विजय दिवस और 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ का जिक्र करते हुए भारतीय सेनाओं के पराक्रम को याद किया. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशन ने भारतीय सेनाओं की क्षमता को दिखाया और आतंकियों व उनके समर्थकों को स्पष्ट संदेश दिया कि वे कहीं भी छिपें, उन्हें अपने किए की सजा जरूर मिलेगी.
