Pollution: दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से निपटने के लिए हुई उच्च-स्तरीय बैठक
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय प्रदूषण से निपटने के लिए विभिन्न राज्यों के साथ लगातार समीक्षा बैठक कर रहा है. इस कड़ी में सोमवार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से निपटने को लेकर बनायी गयी कार्य योजना की समीक्षा को लेकर एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की. इस बैठक में प्रदूषण से निपटने के लिए उठाए गए कदमों और उसके क्रियान्वयन की समीक्षा की गयी.
Pollution: दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त नाराजगी जाहिर कर चुका है. प्रदूषण से निपटने के लिए केंद्र सरकार, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को सख्त कदम उठाने का निर्देश दिया है. केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय प्रदूषण से निपटने के लिए विभिन्न राज्यों के साथ लगातार समीक्षा बैठक कर रहा है. इस कड़ी में सोमवार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से निपटने को लेकर बनायी गयी कार्य योजना की समीक्षा को लेकर एक उच्च-स्तरीय बैठक की. इस बैठक में प्रदूषण से निपटने के लिए उठाए गए कदमों और उसके क्रियान्वयन की समीक्षा की गयी.
बैठक में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय प्रदूषण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह, दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के अलावा दिल्ली और केंद्र सरकार के अधिकारी शामिल हुए. इस दौरान केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने दिल्ली में प्रदूषण को रोकने के लिए विभिन्न एजेंसियों द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना करते हुए कहा कि प्रदूषण से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2021 में कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट(सीएक्यूएम) का गठन किया. इसका मकसद दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण के कारणों का पता लगाना था और इससे निपटने के लिए लंबी अवधि की योजना बनाना था.
ट्रैफिक संचालन को आधुनिक बनाने पर होगा जोर
बैठक में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वायु प्रदूषण से निपटने के लिए स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम को अपनाना होगा. इसके लिए दिल्ली में 62 हॉटस्पॉट की पहचान की गयी है ताकि ट्रैफिक का सही तरीके से संचालन हो सके. प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के साथ ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉगनेशन सिस्टम और दफ्तर के समय में बदलाव होना चाहिए. प्रदूषण रोकने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए. सीक्यूएएम की ओर से बताया गया कि टेरी, आईआईटी दिल्ली, आईआईटीएम पुणे और अन्य संस्थान जनवरी 2026 से प्रदूषण के कारणों का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन करेंगे ताकि इसके स्रोत का पता लगाया जा सके.
