PM नरेंद्र मोदी ने बिलासपुर में किया AIIMS का उद्‌घाटन, 247 एकड़ में फैला है अस्पताल, जानें ये 5 खासियत

बिलासपुर एम्स को 1,470 करोड़ की लागत से बनाया गया है. यह अस्पताल 247 एकड़ से अधिक भू-भाग में फैला है. इस सुपर स्पेशयलिटी अस्पताल में मरीजों को 24 घंटे इमरजेंसी चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जायेगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) का उद्घाटन किया. इस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में मरीजों के लिए कई तरह की सुविधाएं उपलब्ध करायी गयी हैं. ज्ञात हो कि इस अस्पताल का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अक्टूबर 2017 में किया था. इस अस्पताल की खासियत इस प्रकार है-

247 एकड़ में फैला है अस्पताल

बिलासपुर एम्स को 1,470 करोड़ की लागत से बनाया गया है. यह अस्पताल 247 एकड़ से अधिक भू-भाग में फैला है. इस सुपर स्पेशयलिटी अस्पताल में मरीजों को 24 घंटे इमरजेंसी चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जायेगी. इस अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा भी मरीजों को मिलेगी. इस अस्पताल में 18 स्पेशल और 17 सुपर स्पेशल विभाग होंगे.


2017 में पीएम मोदी ने रखी थी आधारशिला

बिलासपुर एम्स का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अक्टूबर 2017 में किया था. पूरे पांच साल बाद यानी अक्टूबर 2022 में इस अस्पताल का उद्‌घाटन कर दिया गया है. इस अस्पताल का निर्माण प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत किया गया है.

अस्पताल की क्षमता 750 बेड की

बिलासपुर एम्स की क्षमता 750 बेड की है. पीएमएसएसवाई के तहत स्थापित इस अस्पताल में 64 आईसीयू बेड होंगे. अस्पताल में 24 घंटे आपातकालीन सुविधा उपलब्ध होगी. साथ ही डायलिसिस सुविधा, अल्ट्रासोनोग्राफी, सीटी स्कैन एवं एमआरआई की सुविधा भी होगी.

आयुष ब्लाॅक की भी है सुविधा

अस्पताल अमृत फार्मेसी व जन औषधि केंद्र और 30 बिस्तरों वाले आयुष ब्लॉक से भी सुसज्जित है. यहां; आयुर्वेद, योगा, नेचरोपैथी, यूनानी, सीधा और होमियोपैथी चिकित्सा पद्धति की स्वास्थ्य सुविधा भी उपलब्ध होगी. साथ ही इन चिकित्सा पद्धतियों की दवाइयां भी मरीजों को उपलब्ध करायी जायेगी.

डिजिटल स्वास्थ्य केंद्र स्थापित

बिलासपुर एम्स में डिजिटल स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किया गया है. जिसके जरिये हिमाचल प्रदेश के जनजातीय और दुर्गम जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करायी जायेगी. अस्पताल द्वारा काजा, सलूनी और केलांग जैसे दुर्गम जनजातीय और अधिक ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से विशेषज्ञों द्वारा स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जायेंगी.

100 विद्यार्थियों को मिलेगा एडमिशन

बिलासपुर एम्स में प्रतिवर्ष 100 विद्यार्थियों को एमबीबीएस के कोर्स में एडमिशन दिया जायेगा. इसके साथ ही 60 स्टूटेंड्‌स को नर्सिंग के कोर्स में एडमिशन दिया जायेगा. इस अस्पताल के निर्माण से हिमाचल प्रदेश के आम नागरिकों को काफी लाभ मिलेगा और स्वास्थ्य सुविधाओं में बढ़ोतरी होगी.

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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