प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रिपरिषद की बैठक में कहा कि 2047 तक “विकसित भारत” बनाना सिर्फ नारा नहीं, बल्कि सरकार की बड़ी प्रतिबद्धता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार का पूरा फोकस अब सुधारों और योजनाओं को जमीन पर तेजी से लागू करने पर होना चाहिए. बैठक में पश्चिम एशिया युद्ध के कारण एनर्जी सप्लाई पर पड़ने वाले असर और उससे निपटने की रणनीति पर भी चर्चा हुई.
चार घंटे से ज्यादा चली इस अहम बैठक में कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और दूसरे मंत्री शामिल हुए. बैठक का मकसद मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के 9 जून को पूरे होने वाले दो साल से पहले विभिन्न योजनाओं और नीतियों की प्रगति और उनके जमीनी असर की समीक्षा करना था.
अल्टरनेटिव फ्यूल पर तेजी से काम करना होगा : पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने बैठक में इकोनॉमी, एग्रीकल्चर, श्रम और एनर्जी समेत नौ अहम क्षेत्रों के कामकाज की समीक्षा की. पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और होर्मुज को लेकर बढ़ते तनाव के बीच भारत के सामने तेल और गैस सप्लाई की चुनौती पर भी चर्चा हुई. सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी ने कहा कि अब देश को बायोगैस और दूसरी रिन्यूएबल एनर्जी जैसे अल्टरनेटिव फ्यूल पर तेजी से काम करना होगा. ऐसा इसलिए ताकि तेल-गैस पर निर्भरता कम हो और किसी भी ग्लोबल क्राइसिस का असर भारत पर कम पड़े.
जनता तक काम का फायदा तेजी से पहुंचना चाहिए : प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों को फिर याद दिलाया कि सरकारी कामकाज में लालफीताशाही कम होनी चाहिए और पारदर्शिता बनी रहनी चाहिए. उन्होंने साफ कहा कि योजनाओं और फैसलों में देरी नहीं होनी चाहिए और जनता तक काम का फायदा तेजी से पहुंचना चाहिए.
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बैठक में प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि सरकारी फाइलें एक टेबल से दूसरी टेबल तक बेवजह नहीं घूमनी चाहिए और प्रक्रियाओं को आसान बनाना जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 12 वर्षों में सरकार की उपलब्धियों की जानकारी लोगों तक बेहतर तरीके से पहुंचाई जाए और फीडबैक सिस्टम को भी मजबूत किया जाए. कैबिनेट फेरबदल और बीजेपी संगठन में बदलाव की अटकलों के बीच हुई इस बैठक में बिजली, कृषि, श्रम, विदेश नीति, इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रेड और कॉरपोरेट मामलों समेत नौ अहम क्षेत्रों पर प्रेजेंटेशन दिए गए.
