पीएम मोदी ने मिडिल ईस्ट संघर्ष पर मुख्यमंत्रियों से की बात, ‘टीम इंडिया’ की भावना पर जोर

Middle East Crisis: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को मिडिल ईस्ट संघर्ष को लेकर मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की. बैठक में रक्षामंत्री, गृहमंत्री और कई अधिकारी भी मौजूद थे. पीएम मोदी ने सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट रहने, तटीय, सीमा और साइबर सुरक्षा मजबूत करने, अफवाह फैलाने या जमाखोरी करने वालों पर कड़ी निगरानी रखने का निर्देश दिया.

Middle East Crisis: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मिडिल ईस्ट संघर्ष पर राज्य की तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों की तैयारियों और योजनाओं की जानकारी ली. प्रधानमंत्री की बैठक में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह राज्यों के मुख्यमंत्री और कई अधिकारी भी मौजूद रहे. बैठक में चुनावी राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल नहीं हुए. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार डिजिटल माध्यम से आयोजित इस बैठक का उद्देश्य ‘टीम इंडिया’ की भावना के तहत केंद्र और राज्यों में समन्वय तय करना था. प्रधानमंत्री ने 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमले शुरू होने के बाद मिडिल ईस्ट संघर्ष पर पहली बार मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की है.

किन राज्यों के सीएम बैठक में हुए शामिल

बैठक में शामिल होने वाले मुख्यमंत्रियों में एन. चंद्रबाबू नायडू (आंध्र प्रदेश), योगी आदित्यनाथ (उत्तर प्रदेश), रेवंत रेड्डी (तेलंगाना), भगवंत मान (पंजाब), भूपेंद्र पटेल (गुजरात), उमर अब्दुल्ला (जम्मू-कश्मीर), सुखविंदर सिंह सुक्खू (हिमाचल प्रदेश), पेमा खांडू (अरुणाचल प्रदेश) और अन्य मुख्यमंत्री शामिल थे.

कैबिनेट सचिवालय करेगा चुनावी राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ बैठक

चुनावी राज्यों के मुख्यमंत्री आचार संहिता लागू होने के कारण इस बैठक में शामिल नहीं हुए. कैबिनेट सचिवालय तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के मुख्य सचिवों के साथ अलग से बैठक करेगा. इससे पहले 25 मार्च को सरकार ने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बैठक करके उन्हें पश्चिम एशिया की स्थिति की जानकारी दी थी.

सरकार ने बुलाई थी सर्वदलीय बैठक

सरकार ने 25 मार्च को पश्चिम एशिया संकट पर सर्वदलीय बैठक बुलाई थी. बैठक में सरकार ने विपक्ष के सवालों का जवाब दिया था. इससे पहले 23 मार्च को लोकसभा में दिए गए बयान में प्रधानमंत्री ने कहा था कि मिडिल ईस्ट संघर्ष के कारण जो हालात बने हैं उसका असर लंबे समय तक रह सकता है. ऐसे में देश को एकजुट और तैयार रहने की जरूरत है, जैसे कोविड-19 महामारी के दौरान रहा था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के दोनों सदनों में पश्चिम एशिया संकट पर बयान भी दिया था. पश्चिम एशिया में इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी से जारी जंग के कारण होर्मुज से जहाजों को गुजरने में काफी परेशानी हो रही है. बहुत कम संख्या में कुछ देश के जहाज होर्मुज पार कर पा रहे हैं. इसके कारण कई देशों में ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है.

विदेश और पेट्रोलियम मंत्रालय लगातार कर रहा है अपडेट

विदेश मंत्रालय की ओर से मिडिल ईस्ट के मौजूदा हालात की जानकारी शेयर की जा रही है. शुक्रवार (27 मार्च) को भी मीडिया से बातचीत के दौरान सवालों के जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने जहाजों के सुरक्षित पारगमन के लिए सभी संबंधित देशों के संपर्क में है. वहीं पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने गुरुवार को कहा था कि भारत में पेट्रोलियम और एलपीजी की आपूर्ति की स्थिति पूरी तरह से सुरक्षित और नियंत्रण में है और सभी खुदरा ईंधन दुकानों के पास पर्याप्त आपूर्ति है. देश में कहीं भी पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कमी नहीं है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >