Goa News: गोवा में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के सरकारी ठेकों के आवंटन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. एक स्थानीय रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एक निजी निर्माण कंपनी ने राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) को कथित तौर पर हेरफेर किए गए दस्तावेज जमा कर बड़े टेंडरों के लिए पात्रता हासिल की. यह टेंडर विवाद प्रदेश सरकार के लिए भी नया विवाद बनकर उभरा है.
ठेकेदार ने दर्ज कराई शिकायत
सिविल इंजीनियर और PWD ठेकेदार की ओर से दायर शिकायतों में कहा गया है कि एक निर्माण कंपनी को क्लास IAA (सुपर) श्रेणी में पंजीकरण दिया गया. यह श्रेणी गोवा PWD में सबसे हाई लेवल की मानी जाती है. शिकायत में दावा किया गया है कि पंजीकरण के लिए जमा किए गए कुछ कार्य पूर्णता प्रमाणपत्रों और परियोजना दस्तावेजों में विसंगतियां देखी गईं.
शिकायत के अनुसार, मुदी टैंक फिलिंग स्कीम से जुड़े दस्तावेजों के अलग-अलग संस्करण अधिकारियों को पेश किए गए थे. इसमें एक ही परियोजना से संबंधित कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र के तीन अलग-अलग संस्करण होने की बात कही गई है. इसके बाद विभाग की सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं.
जॉइंट वेंचर समझौते को लेकर भी हो रही चर्चा
शिकायत में यह भी कहा गया है कि 11 दिसंबर 2019 के एक जॉइंट वेंचर समझौते में किसी अन्य कंपनी को प्रमुख भागीदार बताया गया था, जबकि संबंधित निर्माण कंपनी को सहयोगी भागीदार के रूप में दर्शाया गया था. इसके अलावा, कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले में 51.19 करोड़ रुपये की एक परियोजना से जुड़े दस्तावेजों का भी जिक्र किया गया है. शिकायतकर्ता का कहना है कि यह परियोजना अलग-अलग चरणों में पूरी हुई थी, इसलिए इसे एकल पूर्ण परियोजना के रूप में नहीं माना जाना चाहिए.
शिकायतों में गोवा PWD/WRD-2020 के संशोधित ठेकेदार पंजीकरण नियमों की धारा 18.1 का हवाला दिया गया है. इस नियम के अनुसार, जॉइंट वेंचर के तहत प्राप्त अनुभव का दावा अलग-अलग भागीदार स्वतंत्र रूप से नहीं कर सकते. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान जॉइंट वेंचर समझौते और संबंधित दस्तावेजों का पर्याप्त सत्यापन नहीं किया गया.
अभी तक नहीं आई आधिकारिक प्रतिक्रिया
शिकायतों के अनुसार, संबंधित कंपनी को कई बड़े सरकारी ठेकों में पात्रता मिली. हालांकि, इस पूरे मामले पर अब तक गोवा PWD या संबंधित निर्माण कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
