पीएम मोदी ने शिक्षिका से पूछा, अगर मैं आपका स्टूडेंट होता...टीचर ने दिया मजेदार जवाब, देखें वीडियो

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षक दिवस के मौके पर दिल्ली में नेशनल अवॉर्ड पाने वाले शिक्षकों से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने अपनी पब्लिक स्पीकिंग स्किल्स को बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों से सुझाव मांगे.

पीएम मोदी ने पूछा, "अगर मैं आपका स्टूडेंट होता और एक कुशल वक्ता बनना चाहता, तो आप मुझे क्या सुझाव देतीं? मुझे क्या करना चाहिए?"

इस पर एक शिक्षिका ने जवाब दिया, "सबसे पहले, आपमें आत्मविश्वास होना चाहिए... आत्मविश्वास बहुत ज्यादा अभ्यास से आता है. आपका व्यक्तित्व देखकर मैं खुद भी थोड़ी घबरा गई थी."


नेशनल अवॉर्ड पाने वाले शिक्षकों में से एक से बातचीत करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "काशी के सांसद के तौर पर, मैंने वहां ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूकता अभियान शुरू किया था, और मुझे यह देखकर खुशी हो रही है कि अब महिलाएं खुद आगे आकर जांच करवा रही हैं. पहले हालात ऐसे नहीं थे. एक और अच्छा अनुभव एक ही दिन में सबसे ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना था."

पीएम मोदी ने कहा, बच्चों को स्क्रीन से बाहर निकालकर खेल के मैदान तक लाएं

नेशनल अवॉर्ड पाने वाले शिक्षकों में से एक से बातचीत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "स्क्रीन टाइम अब एक तरह की लत बन गया है. मेरे मन में एक बात आती है: अगर कोई बच्चा खेलों में गहरी दिलचस्पी लेने लगे - और खेलों से मेरा मतलब वीडियो गेम नहीं, बल्कि मैदान पर असल में खेलना है - तो हो सकता है कि वह धीरे-धीरे इस लत से बाहर निकल आए. इस संदर्भ में, हम बच्चों को जितना ज्यादा रचनात्मक कामों में लगाएंगे, हमें ऐसे प्रोग्राम बनाने की आदत उतनी ही ज्यादा डालनी चाहिए जो इसे बढ़ावा दें."

शिक्षक का कर्तव्य है कि बच्चे के भीतर का बचपन जिंदा रहे : पीएम मोदी

"ड्रेस कोड के मुद्दे पर, जो कुछ बड़े शहरों या विश्वविद्यालयों में सामने आया है, अक्सर जानकारी की कमी होती है; कभी-कभी बिना किसी स्पष्टीकरण के नियम थोप दिए जाते हैं. आज शिक्षकों को इससे जुड़े नतीजों और डर के बारे में लगातार जागरूक रहने और यह देखने की जरूरत है कि क्या ऐसे उपायों से बच्चों के व्यवहार में कोई बदलाव आ रहा है. मैं आप सभी से बात कर रहा हूं, लेकिन मैं पूरे शिक्षा समुदाय तक भी एक संदेश पहुंचाना चाहता हूं: बच्चों की जिंदगी से सच में जुड़ने के लिए हमें पाठ्यपुस्तकों और सिलेबस से आगे बढ़ना होगा. हमें बचपन को खत्म नहीं होने देना चाहिए; इसे बचाने के लिए शिक्षक सबसे अच्छी स्थिति में हैं. यह सुनिश्चित करना शिक्षक का कर्तव्य है कि बच्चे के भीतर का बचपन जिंदा रहे."

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लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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