PM: प्रधानमंत्री को उपहार के तौर पर मिले बिहार के 40 स्मृति चिन्हों को ई-नीलामी के लिए किया गया पेश

बिहार की सांस्कृतिक विरासत को प्रधानमंत्री स्मृति चिन्ह ई-नीलामी के 7वें संस्करण में महत्वपूर्ण स्थान मिला है. नीलामी में मधुबनी और सिक्की कला के अद्भुत उपहार सहित राज्य की 40 विशिष्ट वस्तुएं नीलामी के लिए रखी गयी है. इन वस्तुओं के अलावा बिहार संग्रह में पौराणिक कथाओं, त्योहारों, रीति-रिवाजों और सामुदायिक परंपराओं पर आधारित कलाकृतियां भी शामिल हैं, जिन्हें इस क्षेत्र की विशिष्ट और रंगीन शैलियों में प्रस्तुत किया गया है.

PM: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उपहार के तौर पर मिलने वाले सामान की नीलामी की जाती है. इस साल बिहार की सांस्कृतिक विरासत को प्रधानमंत्री स्मृति चिन्ह ई-नीलामी के 7वें संस्करण में महत्वपूर्ण स्थान मिला है. नीलामी में मधुबनी और सिक्की कला के अद्भुत उपहार सहित राज्य की 40 विशिष्ट वस्तुएं नीलामी के लिए रखी गयी है. इन वस्तुओं के अलावा बिहार संग्रह में पौराणिक कथाओं, त्योहारों, रीति-रिवाजों और सामुदायिक परंपराओं पर आधारित कलाकृतियां भी शामिल हैं, जिन्हें इस क्षेत्र की विशिष्ट और रंगीन शैलियों में प्रस्तुत किया गया है. 


स्थानीय महिलाओं और समुदायों द्वारा आज भी प्रचलित ये चित्रकारी जीवंत विरासत की प्रतीक हैं जो मौखिक आख्यानों और सामाजिक स्मृति को संरक्षित करती हैं. नीलामी की जाने वाली वस्तुएं 2 अक्टूबर, 2025 तक सार्वजनिक रूप से अवलोकन के लिए और pmmementos.gov.in पर ऑनलाइन बोली लगाने के लिए उपलब्ध है. प्रधानमंत्री स्मृति चिन्ह ई-नीलामी का आयोजन संस्कृति मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय, दिल्ली के जरिये किया जाता है. 


साल 2019 से चली आ रही है ई- नीलामी की प्रक्रिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट किये गये उपहारों के ई-नीलामी की प्रक्रिया वर्ष 2019 से चली आ रही है. इसके जरिये लोगों को प्रधानमंत्री को भेंट किए गए स्मृति चिन्हों को खरीदने के लिए आमंत्रित किया जाता है. हर वर्ष लोक कला और हस्तशिल्प से लेकर खेल स्मृति चिन्हों सहित हजारों चुनिंदा उपहारों की नीलामी की जाती है. नीलामी से प्राप्त होने वाली धनराशि को पवित्र गंगा नदी को समर्पित नमामि गंगे परियोजना के लिए उपयोग किया जाता है. 

प्रधानमंत्री को भेंट की गयी बिहार के प्रमुख उपहार


भगवान कृष्ण और गोपियों की मधुबनी पेंटिंग नीलामी के लिए रखी गई है. यह कलाकृति भगवान कृष्ण के साथ गोपियों के सानिध्य की सुंदरता को दर्शाने के साथ-साथ दिव्य प्रेम, आनंद और आध्यात्मिक सद्भाव के विषयों को प्रस्तुत करती है. बिहार के मिथिला क्षेत्र में बनी मधुबनी पेंटिंग अपनी स्थूल रेखाओं, विशिष्ट पैटर्न और प्राकृतिक रंगों के उपयोग के लिए प्रसिद्ध है और यह सभी विशेषताएं इस उत्कृष्ट कृति में स्पष्ट हैं. हर कौशल भारतीय लोक कला की समृद्ध परंपरा को दर्शाती है, जहां पौराणिक कथाओं को सूक्ष्म विवरण और जीवंत रंगों के माध्यम से दर्शाया गया है. यह पेंटिंग न केवल कृष्ण के प्रति सदियों पुरानी भक्ति का प्रतीक है, बल्कि भारत की स्थायी सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण भी है. 

बिहार की कलाकृति को दर्शाता मिथिला पेंटिंग और सिक्की आर्ट

मिथिला पेंटिंग में कमल और शिव लिंगम के साथ एक महिला को दर्शाया गया है. एक खूबसूरत मिथिला पेंटिंग जो कभी प्रधानमंत्री को भेंट की गई थी. पोस्टर के रंगों का उपयोग करके कागज पर बनाई गई यह कलाकृति विशिष्ट मिथिला कला रूप को प्रदर्शित करती है, जिसे मधुबनी पेंटिंग के रूप में भी जाना जाता है, जिसका उद्भव बिहार के मिथिला क्षेत्र में हुआ था. पेंटिंग में एक महिला को कमल का फूल पकड़े हुए दिखाया गया है, उसके साथ एक शिव लिंगम है, जो भगवान शिव का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व है. 

नीलामी में भगवान राम और सीता का सिक्की आर्ट फ्रेम भी है. जिसमें भगवान राम और सीता की एक सुंदर और उत्‍कृष्‍ट कलाकृति है, जिसे बिहार की पारंपरिक सिक्की कला शैली में बनाया गया है. यह पेंटिंग एक गहरे रंग की पृष्ठभूमि पर बनाई गई है और दिव्य युगल को सुनहरे रंगों में प्रदर्शित करती है, जो एक अद्भुत विरोधाभास का सृजन करती है. 

हिंदू देवता भगवान राम को उनके धनुष और बाण के साथ चित्रित किया गया है, जो उनकी शक्ति और धार्मिकता का प्रतीक है और अनुग्रह और सौंदर्य से परिपूर्ण सीता जी को उनके सानिध्य में दिखाया गया है. उनके परिधान का उत्‍कृष्‍ट विवरण और उनके शरीर को सुशोभित करने वाले सौम्‍य डिजाइन कलाकार के कौशल और शिल्प कौशल का प्रमाण हैं. 

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Published by: Anjani kumar singh

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