नहीं रहे प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र, साल 2014 में पीएम मोदी के लिए किया था ये खास काम

Pandit Chhannulal Mishra Passed Away : हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के महान कलाकार पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन हो गया. सुबह करीब चार बजे उन्होंने अंतिम सांस ली. आजमगढ़ में जन्मे पंडित जी ने ठुमरी और पुरब अंग की गायकी को अपनी खास शैली से जीवंत किया. उनके निधन पर जानें पीएम मोदी ने क्या कहा?

Pandit Chhannulal Mishra Passed Away : भारतीय शास्त्रीय संगीत के दिग्गज गायक पंडित छन्नूलाल मिश्रा का निधन हो गया. गुरुवार सुबह 4:15 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली. वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे. उनका बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के मेडिकल इंस्टीट्यूट में उनका इलाज चल रहा था. उनका अंतिम संस्कार वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर गुरुवार को किया जाएगा. उनकी बेटी नम्रता मिश्रा ने फोन पर न्यूज एजेंसी ANI को उनके निधन की जानकारी दी.

साल 2014 में वे वाराणसी सीट से पीएम मोदी के प्रस्तावक थे

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा,’’सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है. वे जीवनपर्यंत भारतीय कला और संस्कृति की समृद्धि के लिए समर्पित रहे. उन्होंने शास्त्रीय संगीत को जन-जन तक पहुंचाने के साथ ही भारतीय परंपरा को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने में भी अपना अमूल्य योगदान दिया. यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे सदैव उनका स्नेह और आशीर्वाद प्राप्त होता रहा. साल 2014 में वे वाराणसी सीट से मेरे प्रस्तावक भी रहे थे. शोक की इस घड़ी में मैं उनके परिजनों और प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट करता हूं. ओम शांति!‘’

आजमगढ़ जिले के हरिहरपुर गांव में पंडित छन्नूलाल मिश्र का जन्म हुआ

पंडित छन्नूलाल मिश्र का जन्म 3 अगस्त 1936 को हुआ. उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के हरिहरपुर गांव में उनका जन्म हुआ. उन्हें संगीत की शुरुआती शिक्षा उनके पिता बदरी प्रसाद मिश्र से मिली. इसके बाद उन्होंने किराना घराने के उस्ताद अब्दुल घनी खान से शास्त्रीय संगीत सीखा. मशहूर तबला वादक पंडित अनोखेलाल मिश्र के घर के वे दामाद बने. काशी से जुड़े पंडित छन्नूलाल ने अपनी गहरी और भावपूर्ण आवाज से ठुमरी और पुरब अंग की गायकी को खास पहचान दी.

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कई सम्मान मिल चुके हैं पंडित छन्नूलाल मिश्र को

पंडित छन्नूलाल मिश्र ने अपने संगीत सफर में कई उपलब्धियां हासिल कीं. उन्हें 2010 में पद्मभूषण और 2020 में पद्म विभूषण सम्मान से नवाजा गया. इसके अलावा वे सुर सिंगार संसद, बॉम्बे का ‘शिरोमणि पुरस्कार’, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, बिहार संगीत शिरोमणि पुरस्कार और नौशाद अवॉर्ड जैसे कई सम्मान भी अपने नाम कर चुके हैं. भारत सरकार ने उन्हें संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप से सम्मानित किया. शास्त्रीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले पंडित मिश्र ने फिल्मों में भी अपनी आवाज दी. साल 2011 में प्रकाश झा की फिल्म ‘आरक्षण’ में उन्होंने ‘सांस अलबेली’ और ‘कौन सी डोर’ जैसे गीत गाए.

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Author: Amitabh Kumar

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