Panchayat: जमीनी स्तर पर शासन को सुदृढ़ करने तथा समावेशी ग्रामीण विकास को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार पंचायतों को सशक्त बनाने का काम कर रही है. पंचायतों में शासन तंत्र को सशक्त बनाने और समग्र ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए पंचायत विकास सूचकांक (पीएआई) संस्करण 2.0 जारी किया है. पीएआई देश के पंचायतों के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड है. पंचायतों के कामकाज का मूल्यांकन 150 तय मानकों पर किया गया है, जिसमें स्वास्थ्य, जल, आधारभूत संरचना, आजीविका, शासन एवं पर्यावरणीय सततता सहित विभिन्न क्षेत्रों को शामिल किया गया है. इसका मकसद स्थानीय शासन में पारदर्शिता, डेटा-आधारित निर्णय-निर्माण को बढ़ावा देना और विकसित ग्राम पंचायत के लक्ष्य को हासिल करना है. पीएआई के तहत देश में 3635 ग्राम पंचायत फ्रंट रनर श्रेणी, 118824 पंचायत परफार्मर श्रेणी में है. फ्रंट रनर श्रेणी वाली पंचायतों ने गरीबी दूर करने, आजीविका के साधन बढ़ाने और स्वास्थ्य संबंधी क्षेत्रों में बेहतर काम किया है.
पंचायतों के बीच बेहतर काम करने को मिलेगा प्रोत्साहन
यह सूचकांक सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण (एलएसडीजी) के ढांचे पर आधारित है, जो 17 वैश्विक सतत विकास लक्ष्यों को पंचायती राज संस्थाओं से जुड़े 9 विषयगत क्षेत्रों में शामिल किया गया है. वर्ष 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन जरूरी है और यह लक्ष्य पंचायतों को सशक्त कर ही हासिल किया जा सकता है. पीएआई में देश के 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश के 97 फीसदी पंचायतों ने भागीदारी की और इन पंचायतों ने डेटा पेश किया है. पीएआई के पहले चरण में 80.79 फीसदी पंचायतों ने इसमें भागीदारी की थी.
पीएआई 2.0 के अनुसार आंध्र प्रदेश में कुल 13310 पंचायतों में से 591 ए श्रेणी में, असम में 2192 में से 25, बिहार में 8053 में से 2, छत्तीसगढ़ में 11643 में से 30, गुजरात में 11534 में से 75, झारखंड में 4345 में से 6, महाराष्ट्र में 27894 में से 315, केरल में 941 में से 95 पंचायत ए श्रेणी में शामिल है. पीएआई का उपयोग मंत्रालय योजना बनाने, प्रदर्शन की निगरानी करने और पंचायती राज संस्थाओं को आर्थिक तौर पर सशक्त बनाने का है. साथ ही पंचायतों के बीच इससे बेहतर काम करने को प्रोत्साहन मिलेगा.
