Operation Sindoor: भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद पाकिस्तान ने संघर्ष विराम का किया उल्लंघन, सेना की जवाबी कार्रवाई

Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना ने पीओके में 9 आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए. इससे पहले पाकिस्तान ने पुंछ-राजौरी सेक्टर में संघर्ष विराम का उल्लंघन करते हुए तोपखाने से गोलाबारी की. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना की कार्रवाई को न्यायसंगत बताया. भारतीय सेना ने संयम और रणनीतिक विवेक के साथ जवाबी कार्रवाई की.

Operation Sindoor: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना की ओर से ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तानी आतंकी शिविरों पर हवाई हमला किए जाने से पहले पाकिस्तान ने संघर्ष विराम समझौते का उल्लंघन किया है. इसके कुछ घंटों के बाद ही भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी शिविरों पर ऑपरेशन सिंदूर के तहत सटीक हमले किए.

अतिरिक्त लोक सूचना महानिदेशालय (एडीजीपीआई) की ओर से सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा गया है, ‘पाकिस्तान ने पुंछ-राजौरी सेक्टर में भीतबर गली में तोपखाने से गोलाबारी करके फिर से संघर्ष विराम समझौते का उल्लंघन किया है. भारतीय सेना उसका उचित तरीके से जवाब दे रही है.’

सीमा पार से तोपखाने की गोलीबारी भारत के ऑपरेशन सिंदूर शुरू करने के कुछ घंटों के बाद शुरू हुई, जो पाकिस्तान और पाक-अधिकृत कश्मीर में 9 आतंकी शिविरों को निशाना बनाकर किए गए हमलों की एक सीरीज थी.

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से जारी किए गए एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, ‘थोड़ी देर पहले भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाक-अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करते हुए ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की है, जहां से भरत के खिलाफ आतंकवादी हमलों की योजना बनाई और निर्देशित किया गया था.’

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रक्षा मंत्रालय की ओर से कहा गया है, ‘हमारी कार्रवाई केंद्रित और नपी-तुली थी. किसी भी पाकिस्तानी सैन्य सुविधा को निशाना नहीं बनाया गया है. भारत ने लक्ष्यों के चयन और निष्पादन के तरीके में काफी संयम दिखाया है.’

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लेखक के बारे में

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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