असदुद्दीन ओवैसी ने कहा-बराबरी के लिए नहीं, देश के मुसलमानों को टारगेट करने के लिए बीजेपी कर रही UCC की बात

AIMIM के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने UCC के मुद्दे पर बीजेपी पर जमकर हमला किया है और कहा है कि बीजेपी देश में बराबरी के लिए नहीं बल्कि देश के 18 लाख मुसलमानों को टारगेट करने के लिए यह कानून ला रही है. यह कानून पूरी तरह से देश के संविधान के खिलाफ है.

असदुद्दीन ओवैसी ने एएनआई से बात करते हुए कहा कि सबसे पहले आपको यह समझना होगा कि UCC क्यों लाई जा रही है. बीजेपी देश के नागरिकों के बीच भेदभाव की बात करती है और कहती है कि यह सभी नागरिकों को बराबरी का अधिकार दिलाने की पहल है, लेकिन सच्चाई यह है कि बीजेपी देश के 18 लाख मुसलमानों को टारगेट कर रही है. भारतीय संविधान के आर्टिकल 25 (धर्म की आजादी), 14 (बराबरी का अधिकार), 26 और 29 का उल्लंघन कर रहे हैं.


देश की रूह ही प्लूरलिज्म है

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि हमारे देश की रूह ही प्लूरलिज्म है, लेकिन बीजेपी गैर हिंदुओं पर हिंदुओं का कानून थोपना चाहती है. अमित शाह और उनके सहयोगी इसी प्रयास में हैं. मोदी सरकार द्वारा खुद बनाए गए लॉ कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि UCC भारत के लिए न तो जरूरी है और न ही सही. गोवा में चुनाव आ रहे हैं, मैं अमित शाह, BJP और RSS को चुनौती देता हूं कि वे यहां UCC लागू करके दिखाएं, वे ऐसा नहीं कर सकते हैं. गोवा में कई ऐसे कानून हैं, जो देश के अन्य राज्यों में नहीं हैं. वहां कैथोलिक चर्च एक कपल को तलाक दे सकता है. वहीं वहां यह कानून भी है कि हिंदू महिला अगर 30 साल की उम्र तक बेटे को जन्म ना दे पाए, तो उसके पति को दूसरी शादी करने की आजादी है.

अमित शाह का दावा 2029 तक 21 राज्यों में लागू होगा UCC

असदुद्दीन ओवैसी ने यह बयान तब दिया है जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 13 सितंबर को समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले NDA शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू हो जाएगी. शाह ने कहा कि कई राज्यों में इसे पहले ही लागू किया जा चुका है और बाकी राज्यों में भी काम जारी है. उन्होंने कहा कि ट्रिपल तलाक को समाप्त कर मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है.


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By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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