एग्जाम सिस्टम में सुधार के लिए NTA ने 50 से अधिक कर्मचारियों को हटाया

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए अपने 50 से अधिक कर्मचारियों को हटा दिया है और प्रमुख पदों के लिए नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की है. यह जानकारी शिक्षा मंत्रालय ने सोमवार को यह जानकारी दी.

एनटीए ने रविवार को यूजीसी-नेट परीक्षा के तीन विषयों के प्रश्नपत्रों में कई त्रुटियां पाए जाने के बाद दोबारा परीक्षा कराने का आदेश दिया. इससे पहले नीट-यूजी 2026 की परीक्षा रद्द कर दी गई थी. उसके बाद एजेंसी ने यह निर्णय किया है.


प्रह्लाद जोशी ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ की बैठक

एजुकेशन डिपार्टमेंट की ओर से एक्स पर एक पोस्ट में कहा गया है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने उच्च शिक्षा विभाग के सचिव, एनटीए के महानिदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की. बैठक में मंत्रालय ने कहा कि मंत्री को हालिया घटनाक्रम, विशेष रूप से पूरी व्यवस्था में सुधार के संबंध में एनटीए द्वारा उठाए गए कदमों से अवगत कराया गया. उन्हें बताया गया कि एनटीए से 50 से अधिक कर्मचारियों को हटा दिया गया है. मंत्रालय के अनुसार, मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी, मुख्य वित्त अधिकारी, मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी (सीआईएसओ), महाप्रबंधक (परीक्षा सुरक्षा) और महाप्रबंधक (अनुसंधान एवं विकास तथा साइकोमेट्रिक्स) सहित 10 नये पेशेवर पदों के लिए विज्ञापन जारी किए गए हैं और नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है. शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि साइबर सुरक्षा, साइकोमेट्रिक्स, प्रश्नपत्र तैयार करने और अन्य विशेषज्ञ क्षेत्रों के लिए निजी क्षेत्र से भी विषय विशेषज्ञों को शामिल किया जा रहा है.

परीक्षा प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करने का निर्देश

मंत्री ने परीक्षा प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. उन्होंने गोपनीय संचालन (कॉनऑप्स) ढांचे, अलग-थलग कमरों, एयर-गैप्ड प्रणालियों और उपकरण जमा करने की प्रक्रियाओं में व्यापक बदलाव को युद्धस्तर पर लागू करने का भी निर्देश दिया. मंत्रालय ने कहा कि एनटीए को सभी परीक्षा प्रक्रियाओं का गहन तरीके से ऑडिट करने और सुधारात्मक कदमों पर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है. यह बैठक एनटीए द्वारा रविवार रात यूजीसी-नेट जून 2026 के तीन विषयों के प्रश्नपत्रों -अंग्रेजी, वाणिज्य और समाजशास्त्र- की दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा के बाद हुई. इन प्रश्नपत्रों में कई गलतियों की शिकायतें सामने आई थीं.

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By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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