NHAI: राष्ट्रीय राजमार्ग पर आवारा पशुओं के आवाजाही की तय समय में यात्रियों को मिलेगी जानकारी

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण(एनएचएआई) ने टेलीकॉम सेवा प्रदाता कंपनियों के साथ मिलकर पायलट प्रोजेक्ट चलाने का फैसला लिया है. इसके तहत राष्ट्रीय राजमार्ग पर सफर करने वाले यात्रियों को रियल टाइम में यह संदेश जाएगा कि आगे आवारा पशुओं का क्षेत्र है और सावधानी से गाड़ी चलाएं. इस पहल का मकसद आवारा पशुओं के कारण होने वाले सड़क हादसे को रोकना है.

NHAI: देश में हर साल सड़क हादसे में लाखों लोगों को जान गंवानी पड़ती है. हालांकि सड़क सुरक्षा के लिए केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय की ओर से कई कदम उठाए गए हैं. ब्लैक स्पॉट की पहचान के साथ सड़कों की डिजाइन को बेहतर बनाने का काम किया गया है. सड़क सुरक्षा संबंधी नियमों को सख्त बनाया गया है. इस कड़ी में सड़क सुरक्षा महीना 2026 को लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग पर अचानक आवारा पशुओं के आने के कारण होने वाले सड़क हादसे को रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है. 


राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण(एनएचएआई) ने टेलीकॉम सेवा प्रदाता कंपनियों के साथ मिलकर पायलट प्रोजेक्ट चलाने का फैसला लिया है. इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग पर सफर करने वाले यात्रियों को रियल टाइम में यह संदेश जाएगा कि आगे आवारा पशुओं का क्षेत्र है और सावधानी से गाड़ी चलाएं. इस पहल का मकसद आवारा पशुओं के कारण होने वाले सड़क हादसे को रोकना है. यह पायलट प्रोजेक्ट फिलहाल जयपुर-आगरा और जयपुर-रेवाड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग पर चल रहा है. इसके तहत राष्ट्रीय राजमार्ग पर सफर करने वाले यात्रियों को आवारा पशुओं के क्षेत्र से 10 किलोमीटर पहले संदेश भेजा जाएगा ताकि गाड़ी चालक समय से पहले सावधानी बरत सकें. 


एसएमएस और वॉइस मैसेज करेगा सतर्क


पायलट प्रोजेक्ट के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग पर सफर करने वाले को एसएमएस और वॉइस मैसेज के जरिये सतर्क करने का काम होगा. यह संदेश हिंदी में होगा, जिसमें लिखा होगा ‘आगे आवारा पशु ग्रस्त क्षेत्र है, कृपया सावधानी से चलें’. वॉइस मैसेज में भी यही संदेश होगा. यह संदेश यात्रियों को लगातार नहीं भेजा जाएगा. हर 30 मिनट के अंतराल पर संदेश जाएगा ताकि यात्री सावधानी बरत सकें. 


इस पहल का मकसद टेलीकॉम तकनीक के जरिये यात्रियों को तय समय में संदेश देने का है ताकि ड्राइवर सुरक्षित यात्रा को पूरा कर सके. इसके लिए एनएचएआई ने आवारा पशुओं के क्षेत्र की मैपिंग की है. इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इसे अन्य राष्ट्रीय राजमार्ग पर लागू किया जायेगा. मंत्रालय सभी राष्ट्रीय राजमार्ग पर आवारा पशुओं के संभावित क्षेत्र की पहचान करने में जुटा है. इस पहल के आधार पर आगे सड़क सुरक्षा को लेकर अन्य कदम उठाने की भी तैयारी है. 

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Published by: Anjani Kumar Singh

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